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Tuesday, October 20, 2026
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WHO Report On Mental Health: हर 8 में से 1 व्यक्ति मेंटल डिसऑर्डर का शिकार, 43 सेकंड में 1 सुसाइड, WHO के आंकड़े हैं खौफनाक

WHO Report On Mental Health: दुनियाभर में मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक इस समय दुनिया का हर आठवां व्यक्ति किसी न किसी मेंटल डिसऑर्डर से जूझ रहा है. यही वजह है कि स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित 79वीं वर्ल्ड हेल्थ असेंबली में मेंटल हेल्थ सबसे अहम मुद्दों में शामिल किया गया है. चलिए आपको बताते हैं कि इस दिक्कत से कैसे निपटना चाहिए.

दुनिया की कितनी बड़ी आबादी इससे परेशान?

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट बताती है कि दुनियाभर में एक अरब से ज्यादा लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना कर रहे हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है. सबसे ज्यादा असर युवाओं पर दिखाई दे रहा है. वहीं पुरुषों में आत्महत्या के मामले ज्यादा देखे जा रहे हैं, जबकि महिलाओं में एंग्जायटी और डिप्रेशन की समस्या तेजी से बढ़ रही है. रिपोर्ट के मुताबिक मानसिक स्वास्थ्य आज भी दुनिया के सबसे ज्यादा नजरअंदाज किए जाने वाले हेल्थ संकटों में शामिल है. वैश्विक स्तर पर सरकारें अपने कुल स्वास्थ्य बजट का औसतन सिर्फ दो प्रतिशत हिस्सा ही मानसिक स्वास्थ्य पर खर्च करती हैं.

क्या होता है मेंटल डिसऑर्डर और कितने तरह का होता है?

मेंटल डिसऑर्डर एक ऐसा कंडीशन है, जो लोग कैसे सोचेंगे, वर्ताव करेंगे और कैसा फील करेंगे इसको प्रभावित करता है.  एक्सपर्ट  के अनुसार मानसिक विकार कई तरह के होते हैं. इनमें डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर, एंग्जायटी, सोशल फोबिया,पीटीएसडी, स्किजोफ्रेनिया और ईटिंग डिसऑर्डर जैसी समस्याएं शामिल हैं. ये बीमारियां इंसान के सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने के तरीके को प्रभावित करती हैं. WHO और DSM-5 की रिपोर्ट के मुताबिक एंग्जायटी और डिप्रेशन सबसे आम मेंटस बीमारियां बन चुकी हैं.

दुनियाभर में कितने प्रतिशत बढ़े इसके मामले?

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका क्षेत्र में मेंटल डिसऑर्डर की दर सबसे ज्यादा 15.6 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि यूरोप में यह 14.2 प्रतिशत और दक्षिण-पूर्व एशिया में 13.2 प्रतिशत रही. कोविड-19 महामारी के बाद मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों में अचानक तेजी देखी गई. खासतौर पर एंग्जायटी और डिप्रेशन के मामलों में बड़ा उछाल आया. स्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवोल्यूशन  की रिपोर्ट के मुताबिक डिप्रेशन और एंग्जायटी दुनियाभर में विकलांगता का सबसे बड़ा कारण बनते जा रहे हैं.

सुसाइड के भी बढ़ रहे हैं मामले

मेंटल हेल्थ संकट का सबसे खतरनाक पहलू आत्महत्या के बढ़ते मामले हैं. मेडिकल जर्नल द लैंसेट में पब्लिश एनालिसिस के अनुसार हर साल करीब 7.4 लाख लोग आत्महत्या करते हैं. इसका मतलब है कि दुनिया में हर 43 सेकंड में एक व्यक्ति अपनी जान दे रहा है. 15 से 29 साल के युवाओं में आत्महत्या मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण बन चुकी है.  डब्ल्यूएचओ के अनुसार महिलाओं में मानसिक समस्याएं अक्सर डिप्रेशन और एंग्जायटी के रूप में सामने आती हैं, जबकि पुरुषों में नशे की लत और आक्रामक व्यवहार ज्यादा देखने को मिलता है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पुर्तगाल में एंग्जायटी के सबसे ज्यादा मामले हैं, जबकि डिप्रेशन के मामलों में सीरिया शीर्ष पर है. एक्सपर्ट का कहना है कि अगर समय रहते मेंटल समस्याओं की पहचान और इलाज न किया जाए, तो इसका असर व्यक्ति की जिंदगी के हर हिस्से पर पड़ सकता है.

कैसे कर सकते हैं बचाव 

हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं
रोजाना 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें, फिजिकली एक्टिव रहें और तनाव कम करने के लिए योग या मेडिटेशन को अपनी रूटीन का हिस्सा बनाएं.

अपनों से खुलकर बात करें
अकेलापन या उदासी महसूस होने पर अपनी भावनाओं को मन में दबाकर रखने के बजाय, परिवार या किसी भरोसेमंद दोस्त के साथ जरूर शेयर करें.

प्रोफेशनल मदद लेने में न हिचकिचाएं
अगर एंग्जायटी या डिप्रेशन के लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो इसे छिपाने या इग्नोर करने के बजाय तुरंत किसी काउंसलर की सलाह लें.

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