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Tuesday, October 20, 2026
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Sleep And Ageing: 6 घंटे से कम या 8 घंटे से ज्यादा नींद बन सकती है जल्दी बुढ़ापे की वजह, स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

Sleep And Ageing: रात में बहुत कम या जरूरत से ज्यादा सोना सिर्फ थकान ही नहीं बढ़ाता, बल्कि ये बॉडी के कई जरूरी अंगों की उम्र भी तेजी से बढ़ा सकता है. नेचर जर्नल में 13 मई को पब्लिश हुई एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि कम और ज्यादा दोनों तरह की नींद ब्रेन, हार्ट, फेफड़ों और इम्यून सिस्टम पर बुरा असर डाल सकती है. रिसर्च के मुताबिक सबसे कम खतरा उन लोगों में देखा गया जो रोज करीब 6.4 से 7.8 घंटे की नींद लेते हैं.

नींद क्यों है हमारे लिए जरूरी?

इस स्टडी को कोलंबिया यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर ऑफ रेडियोलॉजी जुनहाओ वेन ने लीड किया. उन्होंने कहा कि हमारी रिसर्च दिखाती है कि बहुत कम और बहुत ज्यादा दोनों तरह की नींद शरीर के लगभग हर अंग की उम्र बढ़ने की रफ्तार तेज कर सकती है. इससे ये साफ होता है कि अच्छी नींद ब्रेन और पूरी बॉडी को हेल्दी रखने में बेहद जरूरी है.

रिसर्च में क्या पता लगाया गया?

रिसर्चर्स ने एजिंग को मापने के लिए मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया. टीम ने 17 अलग-अलग ऑर्गन सिस्टम्स के लिए 23 बायोलॉजिकल क्लॉक्स तैयार किए. इन क्लॉक्स में मेडिकल स्कैन, ब्लड टेस्ट और बॉडी प्रोटीन से जुड़ी जानकारी शामिल की गई, जिससे पता लगाया गया कि किसी इंसान के अंग उसकी असली उम्र के मुकाबले कितनी तेजी से बूढ़े हो रहे हैं.

किन लोगों की उम्र तेजी से बढ़ती है?

इस स्टडी में यूके बायोबैंक के करीब पांच लाख लोगों के हेल्थ डेटा का एनालिसिस किया गया. रिसर्च में एक यू-शेप पैटर्न सामने आया. यानी जो लोग रोज 6 घंटे से कम सोते थे और जो 8 घंटे से ज्यादा सोते थे, दोनों में एजिंग की स्पीड ज्यादा पाई गई. सबसे हेल्दी स्लीप रेंज करीब 7 घंटे मानी गई. कम नींद लेने वाले लोगों में डिप्रेशन, एंग्जायटी, मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज का खतरा ज्यादा देखा गया. वहीं कम और ज्यादा दोनों तरह की नींद फेफड़ों की बीमारियों जैसे क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और अस्थमा से भी जुड़ी मिली. इसके अलावा एसिड रिफ्लक्स जैसी पेट की समस्याओं का रिस्क भी बढ़ता पाया गया.

कम नींद लेने के क्या होते हैं नुकसान?

जुनहाओ वेन के मुताबिक नींद सिर्फ दिमाग से जुड़ी चीज नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी बॉडी पर पड़ता है. उन्होंने कहा कि स्लीप ड्यूरेशन हमारी पूरी फिजियोलॉजी से जुड़ी होती है और इसका असर शरीर के लगभग हर हिस्से पर दिखाई देता है. रिसर्च टीम ने बुजुर्ग लोगों में डिप्रेशन पर भी असर देखा. एनालिसिस में सामने आया कि कम नींद सीधे तौर पर डिप्रेशन को बढ़ा सकती है, जबकि ज्यादा नींद ब्रेन और बॉडी फैट में होने वाले बदलावों के जरिए इसका असर डाल सकती है. रिसर्चर्स का मानना है कि कम और ज्यादा सोने वाले लोगों के लिए अलग-अलग तरह की हेल्थ केयर की जरूरत पड़ सकती है. हालांकि स्टडी ये साबित नहीं करती कि सिर्फ नींद ही तेजी से बूढ़ा होने की वजह है, लेकिन रिसर्चर्स का कहना है कि सही स्लीप हैबिट्स बढ़ती उम्र में हेल्थ को बेहतर बनाए रखने का अहम हिस्सा हो सकती हैं.

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