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Tuesday, August 18, 2026
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Heart Attack Recovery: ब्रश न करना बन सकता है जानलेवा! स्टडी में खुलासा – दिल की बीमारी का बढ़ रहा खतरा

Heart Attack Recovery: ज्यादातर लोग मानते हैं कि ब्रश और फ्लॉस करना सिर्फ दांत साफ रखने और बदबू से बचने के लिए जरूरी है. लेकिन नई स्टडी बताती है कि मुंह की सेहत का दिल पर भी गहरा असर पड़ सकता है, खासकर हार्ट अटैक के बाद. चलिए आपको बताते हैं कि स्टडी में क्या निकला.

हार्ट अटैक के बाद रिकवरी मुश्किल

जापान की टोक्यो मेडिकल एंड डेंटल यूनिवर्सिटी की एक स्टडी, जो इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ओरल साइंस में प्रकाशित हुई है, उसमें एक चौंकाने वाला संबंध सामने रखा है. इसमें बताया गया है कि मुंह में पाई जाने वाली एक आम बैक्टीरिया हार्ट के ठीक होने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है. यानी अगर मुंह की सेहत खराब है, तो हार्ट अटैक के बाद रिकवरी मुश्किल हो सकती है.

रिकवरी की कोशिश करता है हार्ट

हार्ट अटैक के बाद शरीर खुद को ठीक करने की कोशिश करता है. इसमें एक अहम प्रक्रिया होती है, जिसे ऑटोफैगी कहा जाता है. इसमें सेल्स अपने अंदर जमा खराब हिस्सों को साफ करके दोबारा इस्तेमाल करती हैं, जिससे दिल को ठीक होने में मदद मिलती है. रिसर्चर ने खास तौर पर पोर्फाइरोमोनस जिंजिवालिस नाम की बैक्टीरिया पर ध्यान दिया. यह बैक्टीरिया मुंह में पाया जाता है और मसूड़ों की बीमारी का कारण बनता है. अगर समय पर इलाज न हो, तो मसूड़े सूज जाते हैं, खून आने लगता है और दांत भी गिर सकते हैं.

क्या है जिंजिपेन?

साइंटिस्ट को पहले से पता था कि यह बैक्टीरिया शरीर के दूसरे हिस्सों में भी पहुंच सकता है, लेकिन यह दिल को कैसे प्रभावित करता है, यह साफ नहीं था. इसे समझने के लिए उन्होंने जिंजिपेन नाम के एक पदार्थ का अध्ययन किया, जो यह बैक्टीरिया बनाता है.  जिंजिपेन एक तरह का प्रोटीन होता है, जो शरीर के टिश्यू को नुकसान पहुंचाने में मदद करता है और शरीर की इम्यून सिस्टम से बच निकलता है. रिसर्चर ने यह जानने की कोशिश की कि यह हार्ट के सेल्स पर क्या असर डालता है.

क्या निकला नतीजा?

इसके लिए उन्होंने बैक्टीरिया का एक ऐसा रूप तैयार किया, जिसमें जिंजिपेन नहीं बनता था. फिर इसकी तुलना सामान्य बैक्टीरिया से की गई.  नतीजे साफ थे कि जिन सेल्स पर बिना जिंजिपेन वाला बैक्टीरिया असर कर रहा था, वे ज्यादा स्वस्थ रहीं. जबकि सामान्य बैक्टीरिया के संपर्क में आई सेल्स को ज्यादा नुकसान हुआ. चूहों पर किए गए प्रयोग में भी यही बात सामने आई। जिन चूहों में सामान्य बैक्टीरिया था, उनमें हार्ट अटैक के बाद दिल को ज्यादा नुकसान हुआ. रिसर्च में पाया गया कि जिंजिपेन ऑटोफैगी की प्रक्रिया को बाधित करता है. इससे सेल्स के अंदर खराब पदार्थ जमा होने लगते हैं, जो दिल की मरम्मत को धीमा कर देते हैं. यही वजह है कि दिल को ठीक होने में ज्यादा समय लगता है और नुकसान बढ़ जाता है.

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