39.8 C
New Delhi
Wednesday, June 10, 2026
Homeराजस्थानRajasthan News: अब स्कूलों में ‘पिता’ नहीं ‘बापो’ कहेंगे बच्चे, 11 जिलों...

Rajasthan News: अब स्कूलों में ‘पिता’ नहीं ‘बापो’ कहेंगे बच्चे, 11 जिलों में लागू होगा नया प्लान

Rajasthan News: राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आ रही है। अब प्रदेश के बच्चे अपनी स्कूल की किताबों में किताबी ज्ञान के साथ-साथ वही शब्द पढ़ेंगे जो वे अपने घरों में बोलते हैं। शिक्षा विभाग ने प्रदेश में बहुभाषी शिक्षा परियोजना शुरू की है, जिसके तहत अब क्लास में मास्टर जी पिता की जगह बापो और रोटी की जगह रोटलो जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर बच्चों को पढ़ाएंगे।

यूनिसेफ और रूम टू रीड का साथ

दरअसल, यह पूरी योजना यूनिसेफ (UNICEF), रूम टू रीड और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन के सहयोग से चलाई जा रही है। शुरुआती तौर पर इसे प्रदेश के 11 जिलों में लागू करने की तैयारी है। गौरतलब है कि इस प्रोजेक्ट का मकसद स्कूल और घर की भाषा के बीच के अंतर को खत्म करना है, ताकि बच्चा स्कूल आने से डरे नहीं बल्कि उसे अपनापन महसूस हो।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आरएससीईआरटी (RSCERT) की निदेशक श्वेता फगेड़िया ने बताया कि इस योजना को लागू करने से पहले दो चरणों में बड़ा सर्वे किया गया था। पहले चरण में प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर और उदयपुर समेत 9 जिलों के 20 हजार से ज्यादा स्कूलों में सर्वे हुआ। सर्वे में सामने आया कि वागड़ी और मेवाड़ी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाएं हैं। इसी के तहत दूसरे चरण में 24 जिलों के करीब 3.66 लाख बच्चों पर सर्वे किया गया, ताकि उनकी बोलचाल के लहजे को समझा जा सके।

सिरोही और डूंगरपुर में दिखा चमत्कार

बता दें कि इस प्रोजेक्ट का ट्रायल डूंगरपुर के बिछीवाड़ा और सिरोही के आबूरोड ब्लॉक के 200 स्कूलों में किया गया। जब वागड़ी बोली के पाणी, बापू, घरो, छोकरो, आवो और रोटली जैसे शब्दों और गरासिया बोली के आई (मां), बापो (पिता), मितर (दोस्त) जैसे शब्दों को शिक्षा में शामिल किया गया तो इससे बच्चों के लिए पढ़ाई अधिक सहज हो गयी है और बच्चों की हाजिरी 58% से बढ़कर 66% हो गई। अक्षर पहचानने वाले बच्चों की संख्या महज 6% से उछलकर 61% पर पहुंच गई।

इस फैसले का सबसे बड़ा असर ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के बच्चों पर पड़ेगा। अक्सर देखा जाता है कि घर में स्थानीय बोली बोलने वाला बच्चा जब स्कूल में शुद्ध हिंदी या अंग्रेजी सुनता है, तो उसे समझने में परेशानी होती है। मगर स्थानीय शब्दों के जुड़ने से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ेगी और ड्रॉपआउट की दर में भारी कमी आएगी। यह राजस्थान की संस्कृति और बोलियों को जीवित रखने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।

RELATED ARTICLES
New Delhi
clear sky
39.8 ° C
39.8 °
39.8 °
15 %
1.8kmh
4 %
Tue
40 °
Wed
46 °
Thu
45 °
Fri
43 °
Sat
42 °

Most Popular