भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान सीमा से लगभग 100 किलोमीटर दूर, राजस्थान के जैसलमेर स्थित पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में ‘वायु शक्ति‑26′ अभ्यास सफलतापूर्वक आयोजित किया. इस अभ्यास में वायुसेना की युद्ध तैयारी, आपसी तालमेल और आधुनिक तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया गया. ऑपरेशन सिंदूर के समय भी भारतीय वायु सेना ने इसी तरह की ड्रिल की थी, जब पाकिस्तान को अंदाजा नहीं था कि भारत इस प्रकार की प्रतिक्रिया दे सकता है.
राष्ट्रपति मुख्य अतिथि, संयुक्त एयर ऑपरेशंस का प्रदर्शन
तीनों सेनाओं की सुप्रीम कमांडर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस फायर‑पावर प्रदर्शन में मुख्य अतिथि रहीं. अभ्यास में दिखाया गया कि वायुसेना कठिन और वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में संयुक्त एयर ऑपरेशंस कैसे अंजाम देती है. वायु शक्ति से पहले राष्ट्रपति ने स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में उड़ान भरी. यह रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की बढ़ती ताकत को दर्शाता है, क्योंकि ‘प्रचंड’ भारत में बना लड़ाकू हेलीकॉप्टर है.
पहली बार तय युद्ध‑परिदृश्य पर आधारित ड्रिल
पहली बार वायु शक्ति अभ्यास को एक तय युद्ध‑परिदृश्य के आधार पर अंजाम दिया गया. पूरे अभ्यास में ऑपरेशन सिंदूर की वास्तविक झलक देखने को मिली. इसे वास्तविक युद्ध जैसे माहौल में रूपांतरित किया गया, जो अपने आप में विशिष्ट है. ड्रिल में एयर स्ट्राइक, एयर‑डिफेंस ऑपरेशन, स्पेशल फोर्स मिशन और मानवीय सहायता अभियानों को शामिल किया गया.
राष्ट्रीय गीत‑गान से शुरुआत; चेतक फ्लाई‑पास्ट और रफाल का सॉनिक बूम
अभ्यास की शुरुआत राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान से हुई. इसके बाद चेतक हेलीकॉप्टरों ने तिरंगा, एयर फोर्स ध्वज और ऑपरेशन सिंदूर का झंडा लेकर फ्लाई‑पास्ट किया. ऑपरेशन सिंदूर के ‘हीरो’ रफाल फाइटर जेट के तेज सॉनिक बूम के साथ वायु‑शक्ति युद्ध अभ्यास की शुरुआत हुई. दिन से रात तक चले अभ्यास में, रात के चरण समेत 130 से अधिक एयरक्राफ्ट शामिल हुए.
फाइटर, ट्रांसपोर्ट और हेलीकॉप्टर एसेट्स की भागीदारी
भाग लेने वाले विमानों में रफाल, सुखोई‑30 एमकेआई, मिराज‑2000, मिग‑29, जगुआर, हॉक, तथा ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट सी‑130जे, सी‑295, सी‑17 ग्लोबमास्टर शामिल थे. हेलीकॉप्टरों में एमआई‑17 वी5, ध्रुव और प्रचंड सम्मिलित रहे. ‘प्रचंड’ में कमांड‑इन‑चीफ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी उड़ान भरी.
एयर‑टू‑ग्राउंड स्ट्राइक और एयर‑डिफेंस का प्रदर्शन
फाइटर विमानों ने दुश्मन के ‘नकली’ ठिकानों पर सटीक हमले किए—इन ठिकानों को डेमो के तौर पर इस्तेमाल किया गया, ताकि दिखाया जा सके कि असल युद्ध में भारत कैसे दुश्मन के ठिकानों को निष्क्रिय करता है. इसके लिए आधुनिक एयर‑टू‑ग्राउंड हथियार और लंबी दूरी की मारक क्षमता का प्रयोग हुआ. साथ ही, दुश्मन के हवाई हमले से रक्षा करने वाले एयर‑डिफेंस सिस्टम की शक्ति भी दिखाई गई. वही एयर‑डिफेंस, जिसने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान से आने वाली मिसाइलों को रोका था और उनके AWACS विमान को भी निष्क्रिय किया था. आकाश और स्पाइडर मिसाइल‑सिस्टम ने दुश्मन के हवाई खतरों को रोकने का प्रदर्शन किया, जबकि एल‑70 और एम‑777 ने भी अपनी क्षमता दिखाई.
संयुक्तता: गरुड़‑पैरा एसएफ की बंधक‑मुक्ति ड्रिल
अभ्यास में सेना और वायुसेना ने मिलकर काम किया. शाम के समय गरुड़ स्पेशल फोर्स और पैरा एसएफ कमांडो को एमआई‑17 हेलीकॉप्टर से उतारा गया. उन्होंने शहर‑जैसे इलाके में बंधक‑मुक्ति अभियान का अभ्यास किया, ताकि ‘फुल‑स्केल वॉर’ की स्थिति में रिहायशी क्षेत्रों में स्पेशल फोर्स ऑपरेशंस के क्रियान्वयन की तैयारियाँ परखी जा सकें.
