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RBI ने कई बैंकों पर लगाया लाखों का जुर्माना: बैंक ऑफ महाराष्ट्र, CSB बैंक सबसे ज्यादा प्रभावित

RBI Action: यह कार्रवाई विभिन्न उल्लंघनों जैसे डेटा साझाकरण में चूक, KYC/लाभार्थी पहचान, लोन-टू-वैल्यू (LTV) अनुपात बनाए रखने में विफलता, अनुचित प्रथाएं, ग्राहक संपर्क नियम और NPA वर्गीकरण में गड़बड़ी के आधार पर की गई है।

RBI Action: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने 13 फरवरी 2026 को नियामकीय निर्देशों के उल्लंघन के लिए तीन बैंकों और दो गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) पर कुल 1.35 करोड़ रुपये से अधिक का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई विभिन्न उल्लंघनों जैसे डेटा साझाकरण में चूक, KYC/लाभार्थी पहचान, लोन-टू-वैल्यू (LTV) अनुपात बनाए रखने में विफलता, अनुचित प्रथाएं, ग्राहक संपर्क नियम और NPA वर्गीकरण में गड़बड़ी के आधार पर की गई है। आरबीआई ने स्पष्ट किया कि ये जुर्माने नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करने और ग्राहक हितों की रक्षा के लिए हैं। जुर्माने की राशि तय समयसीमा में जमा करानी होगी, अन्यथा आगे की कार्रवाई हो सकती है।

RBI Action: बैंकों और NBFCs पर लगे जुर्माने

सीएसबी बैंक (CSB Bank): सबसे ज्यादा जुर्माना 63.60 लाख रुपये। कारण – बैंक प्रतिनिधि (Business Correspondents) के साथ ऐसे कार्यों के लिए समझौता किया जो निर्धारित दायरे से बाहर थे। साथ ही कुछ बचत खातों पर शुल्क लगाने से पहले ग्राहकों को स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। यह RBI के ‘Scope of activities to be undertaken by Business Correspondents’ और ‘Customer Service in Banks’ निर्देशों का उल्लंघन है।

बैंक ऑफ महाराष्ट्र: 32.50 लाख रुपये का जुर्माना। कारण – स्वयं सहायता समूह (SHG) सदस्यों का डेटा क्रेडिट सूचना कंपनियों को रिपोर्ट नहीं किया गया और कुछ खातों में लाभार्थी (Beneficial Owner) की पहचान सुनिश्चित नहीं की गई। यह RBI के क्रेडिट इन्फॉर्मेशन रिपोर्टिंग और KYC निर्देशों का उल्लंघन है।

डीसीबी बैंक (DCB Bank): 29.60 लाख रुपये का जुर्माना। कारण – कुछ गैर-कृषि गोल्ड लोन खातों में निर्धारित लोन-टू-वैल्यू (LTV) अनुपात को ऋण अवधि के दौरान बनाए नहीं रखा गया। यह RBI के गोल्ड लोन नियमों का उल्लंघन है।

नवी फिनसर्व (Navi Finserv): 3.80 लाख रुपये का जुर्माना। कारण – बकाया ऋण वसूली के दौरान ग्राहकों से अनुचित समय पर संपर्क किया गया और संदेश भेजने में निर्धारित आचार नियमों का पालन नहीं किया। यह ग्राहक संरक्षण और डेटा संचार नियमों का उल्लंघन है।

आईआईएफएल फाइनेंस (IIFL Finance): 5.30 लाख रुपये का जुर्माना। कारण – पुनर्गठन के दौरान कुछ खातों को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) के रूप में सही ढंग से वर्गीकृत नहीं किया गया। यह NPA वर्गीकरण नियमों का उल्लंघन है।

RBI Action: आरबीआई की रणनीति और प्रभाव

आरबीआई ने इन जुर्मानों को वैधानिक निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों के आधार पर लगाया है। बैंकिंग क्षेत्र में अनुपालन को मजबूत करने के लिए केंद्रीय बैंक लगातार सख्त हो रहा है। ये कार्रवाइयां ग्राहक सेवा, पारदर्शिता और जोखिम प्रबंधन पर फोकस करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे जुर्माने बैंकों पर अनुपालन लागत बढ़ा सकते हैं, लेकिन लंबे समय में ग्राहक विश्वास और वित्तीय स्थिरता मजबूत होगी। आरबीआई ने स्पष्ट किया कि ये जुर्माने किसी लेन-देन की वैधता पर सवाल नहीं उठाते, बल्कि नियामकीय चूक पर हैं।

RBI Action: अग्रणी बैंक योजना

आरबीआई ने साथ ही ‘अग्रणी बैंक योजना’ (Lead Bank Scheme) के संशोधन प्रस्ताव भी जारी किए हैं, जिसका उद्देश्य जिला स्तर पर विकास गतिविधियों का बेहतर समन्वय, वित्तीय समावेशन और प्राथमिकता क्षेत्रों में ऋण वितरण सुनिश्चित करना है। नए दिशानिर्देशों में SLBC और LDM की भूमिका को सशक्त बनाना शामिल है। यह कदम बैंकिंग सेवाओं को अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में है।

यह कार्रवाई बैंकिंग क्षेत्र में अनुशासन और ग्राहक हितों की रक्षा के लिए आरबीआई की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। प्रभावित बैंकों ने अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन वे जुर्माने का भुगतान करने के लिए तैयार हैं।

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