Deepinder Goyal: जोमैटो और ब्लिंकिट की पैरेंट कंपनी इटरनल लिमिटेड (पूर्व में जोमैटो लिमिटेड) के फाउंडर और ग्रुप सीईओ दीपिंदर गोयल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी पुष्टि की है। गोयल का इस्तीफा 1 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा। उनकी जगह ब्लिंकिट के मौजूदा सीईओ और फाउंडर अल्बिंदर सिंह ढींढसा ग्रुप सीईओ की जिम्मेदारी संभालेंगे। गोयल कंपनी के बोर्ड में वाइस चेयरमैन और नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में बने रहेंगे, जिसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी होगी।
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Deepinder Goyal: गोयल का पत्र, उच्च जोखिम वाले नए विचारों की तलाश
शेयरधारकों को लिखे एक खुले पत्र में दीपिंदर गोयल ने इस्तीफे का कारण स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में उनका ध्यान ऐसे नए विचारों की ओर गया है, जिनमें काफी अधिक जोखिम, प्रयोग और अन्वेषण शामिल है। गोयल ने लिखा, “ये विचार सार्वजनिक कंपनी जैसे इटरनल के बाहर ही बेहतर तरीके से आगे बढ़ाए जा सकते हैं, क्योंकि कंपनी को अपनी मौजूदा व्यावसायिक रणनीति पर केंद्रित और अनुशासित रहना जरूरी है। अगर ये विचार कंपनी के रणनीतिक दायरे में आते, तो मैं इन्हें कंपनी के भीतर ही आगे बढ़ाता।”
Deepinder Goyal: 18 साल बाद एग्जीक्यूटिव भूमिका से अलग
उन्होंने आगे कहा कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें लगता है कि वे इटरनल में मौजूदा काम जारी रखते हुए बाहर नए विचारों पर काम कर सकते हैं, लेकिन भारत में एक सार्वजनिक कंपनी के सीईओ से कानूनी और अन्य अपेक्षाएं एक ही लक्ष्य पर केंद्रित रहने की मांग करती हैं। गोयल ने 2008 में जोमैटो (तब फूडिएबे) की सह-स्थापना की थी और 18 साल बाद अब एग्जीक्यूटिव भूमिका से अलग हो रहे हैं।
Deepinder Goyal: अब अल्बिंदर ढींढसा संभालेंगे जिम्मेदारी
अल्बिंदर ढींढसा ब्लिंकिट के फाउंडर हैं, जिन्होंने 2013 में कंपनी (तब ग्रोफर्स) शुरू की थी। 2022 में जोमैटो ने ब्लिंकिट को अधिग्रहित किया था। ढींढसा ने क्विक कॉमर्स सेगमेंट में कंपनी को मजबूत स्थिति दिलाई है। आईआईटी दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक और कोलंबिया यूनिवर्सिटी से एमबीए करने वाले ढींढसा पहले जोमैटो में इंटरनेशनल ऑपरेशंस के हेड भी रह चुके हैं। कंपनी का कहना है कि ढींढसा अब ग्रुप स्तर पर एक्जीक्यूशन और ऑपरेशनल लीडरशिप पर फोकस करेंगे, जबकि ब्लिंकिट उनकी प्राथमिकता बनी रहेगी।
Deepinder Goyal: 10-मिनट डिलीवरी विवाद का बैकग्राउंड
गोयल के इस्तीफे की घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब क्विक कॉमर्स सेक्टर में 10-मिनट डिलीवरी को लेकर बड़ा विवाद हुआ। हाल ही में यूनियन लेबर मिनिस्टर मनसुख मांडविया ने ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म्स के अधिकारियों से मुलाकात की थी। उन्होंने डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा और कार्य स्थितियों पर जोर देते हुए 10-मिनट डिलीवरी के सख्त वादे को ब्रांडिंग और प्रचार से हटाने की सलाह दी।
मंत्री ने कहा कि अत्यधिक तेज डिलीवरी टाइमलाइन से गिग वर्कर्स की जान को खतरा बढ़ता है। इसके बाद ब्लिंकिट सहित कई कंपनियों ने ऐप और मार्केटिंग से 10-मिनट का वादा हटा दिया। यह कदम गिग वर्कर्स यूनियनों की मांगों और सरकार के दबाव के बाद आया, जिससे सेक्टर में सुरक्षा मानकों पर फोकस बढ़ा है।
कंपनी के लिए नया अध्याय
यह लीडरशिप बदलाव इटरनल के लिए महत्वपूर्ण है, जहां फूड डिलीवरी (जोमैटो) और क्विक कॉमर्स (ब्लिंकिट) दोनों सेगमेंट तेजी से बढ़ रहे हैं। गोयल के इस्तीफे के बावजूद कंपनी ने स्पष्ट किया कि रणनीति में कोई बदलाव नहीं होगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ढींढसा की क्विक कॉमर्स विशेषज्ञता कंपनी को प्रतिस्पर्धा में आगे रखेगी।
गोयल ने कंपनी को भारत का प्रमुख फूड टेक और क्विक कॉमर्स प्लेयर बनाया। उनका यह फैसला स्टार्टअप जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां फाउंडर्स अक्सर नए वेंचर्स की तलाश में एग्जीक्यूटिव भूमिकाओं से अलग होते हैं।
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