Trump Tariffs: ईरान में राष्ट्रव्यापी उथल-पुथल ने भारत की नींद उड़ा दी है। दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब पूरे देश में फैल चुके हैं, जिसमें 100 से अधिक शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। ये प्रदर्शन शुरुआत में आर्थिक संकट (महंगाई, मुद्रा अवमूल्यन, बेरोजगारी) से जुड़े थे, लेकिन अब वे अयातुल्लाह अली खामेनेई के शासन के खिलाफ खुली बगावत में बदल चुके हैं। स्लोगन जैसे “डेथ टू खामेनेई”, “इस साल सैयद अली गिरेगा” और “न तो गाजा न लेबनान, मेरा जीवन ईरान के लिए” सुनाई दे रहे हैं।
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Trump Tariffs: सरकार की सख्ती और इंटरनेट ब्लैकआउट
ईरानी सेना और सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी, आंसू गैस और लाइव फायर का इस्तेमाल किया है। जनवरी 2026 तक कम से कम 50-75 लोग मारे जा चुके हैं, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं। पूरे देश में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं ब्लॉक कर दी गई हैं, जिससे प्रदर्शनकारियों का समन्वय मुश्किल हो गया है। सुप्रीम लीडर खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को “सबोटर्स” और “विदेशी एजेंट” करार दिया है और कहा है कि “हम पीछे नहीं हटेंगे”।
Trump Tariffs: ट्रंप का 25% टैरिफ धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया जाएगा। यह भारत के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि भारत ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक है। FY 2024-25 में भारत-ईरान व्यापार 1.68 बिलियन डॉलर रहा, जिसमें भारत ने 1.24 बिलियन का निर्यात (चावल, चाय, चीनी, दवाएं, इलेक्ट्रिकल मशीनरी) किया और 0.44 बिलियन का आयात (ड्राई फ्रूट्स, केमिकल्स, ग्लास प्रोडक्ट्स) किया। ट्रंप की यह नीति भारत को और टैरिफ का सामना करा सकती है, खासकर रूसी तेल खरीद के लिए पहले से लगे 25% टैरिफ के साथ।
Trump Tariffs: चाबहार पोर्ट पर सबसे बड़ा खतरा
ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित चाबहार पोर्ट भारत के लिए रणनीतिक महत्व का है। यह भारत को पाकिस्तान को बायपास कर अफगानिस्तान, मध्य एशिया (उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, कजाकिस्तान) और यूरोप तक सीधा पहुंच देता है। भारत ने इस पर 500 मिलियन डॉलर से अधिक निवेश किया है। 2026 के मध्य तक पोर्ट की क्षमता 100,000 से 500,000 TEUs तक बढ़ाने और चाबहार-जाहेदान रेलवे लाइन पूरी करने की योजना है। लेकिन प्रदर्शन, इंटरनेट ब्लैकआउट और सप्लाई चेन डिसरप्शन से काम धीमा पड़ सकता है, जिससे प्रोजेक्ट में देरी होगी। यह भारत की “कनेक्ट सेंट्रल एशिया” नीति को कमजोर करेगा और पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट (चीन द्वारा संचालित) को फायदा पहुंचाएगा।
Trump Tariffs: INSTC कॉरिडोर का संकट
इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) चाबहार को मुख्य हिस्सा मानता है। यह 7,200 किमी लंबा मल्टी-मोडल नेटवर्क भारत को ईरान, रूस, यूरोप और कैस्पियन सागर से जोड़ता है। इससे ट्रांजिट समय 40% और लागत 30% कम होती है। अस्थिरता से कार्गो मूवमेंट रुक सकता है, जिससे भारत का व्यापार प्रभावित होगा।
Trump Tariffs: तेल आपूर्ति पर असर
ईरान दुनिया का प्रमुख तेल उत्पादक है। अगर संकट हॉर्मुज जलडमरूमध्य तक पहुंचा, जहां विश्व का 20% क्रूड ऑयल गुजरता है, तो वैश्विक तेल कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत अपनी 80% से अधिक क्रूड जरूरत आयात करता है, इसलिए पेट्रोल-डीजल कीमतें बढ़ेंगी, महंगाई बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ेगा।
Trump Tariffs: भारत की चिंता और रणनीतिक सुरक्षा
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की स्थिरता भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। पूर्व राजनयिक अनिल त्रिगुणायत ने कहा, “चाबहार और INSTC भारत के लिए क्रिटिकल हैं।” अगर संकट गहराया तो भारत को अमेरिका, चीन और पाकिस्तान के बीच संतुलन बनाना पड़ेगा। न्यू दिल्ली स्थिति पर नजर रख रही है और दीर्घकालिक प्रभावों के लिए तैयार है। ईरान संकट अब सिर्फ तेहरान की समस्या नहीं, बल्कि भारत के व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव के लिए बड़ा खतरा बन चुका है।
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