Bihar Politics: बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगला खाली करने के आदेश पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भवन निर्माण विभाग ने औपचारिक नोटिस जारी कर उन्हें वैकल्पिक आवास आवंटित किया है, लेकिन राजद ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। वहीं, सत्ताधारी एनडीए ने लालू परिवार पर लंबे समय तक सरकारी संपत्ति पर कब्जा रखने के आरोप लगाए। अब राजद ने पलटवार करते हुए जदयू और सहयोगी नेताओं पर अवैध कब्जे के गंभीर आरोप लगाए हैं।
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Bihar Politics: भवन निर्माण विभाग ने दिया 10 सर्कुलर रोड खाली करने का आदेश
भवन निर्माण विभाग ने 25 नवंबर को राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड खाली करने का निर्देश दिया था। इसके बाद सामान शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू हो गई, जिसमें रात के समय गमले और अन्य सामान बाहर निकाले जाने की खबरें आईं। जदयू ने इसे लेकर तहखाना और छिपी संपत्ति के आरोप लगाए थे। अब राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवल किशोर यादव ने विभाग को पत्र लिखकर जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय झा, लोकसभा सांसद देवेश चंद्र ठाकुर और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पर सवाल उठाए हैं।
Bihar Politics: नवल किशोर यादव ने विभाग को पत्र लिखा
पत्र में कहा गया कि संजय झा और देवेश चंद्र ठाकुर को पहले मंत्री या सभापति पद के कारण बिहार केंद्रीय पूल से बंगले आवंटित हुए थे। लेकिन अब दिल्ली में सरकारी आवास मिलने के बावजूद वे पटना के बंगलों पर कब्जा बनाए हुए हैं। राजद ने पूछा कि किन नियमों के तहत उन्हें यह अनुमति है? क्या वे निर्धारित किराए का दस गुना भुगतान कर रहे हैं या राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे हैं? इसी तरह जीतन राम मांझी पटना सेंट्रल पूल के बंगले में किस हैसियत से रह रहे हैं?
Bihar Politics: नियमों का स्पष्टीकरण और अतिरिक्त किराया वसूली की मांग
राजद ने विभाग से बंगलों की मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने, खाली कराने की तिथि बताने और अतिरिक्त उपयोग के लिए वसूले गए किराए का खुलासा करने की मांग की है। पार्टी ने इसे पारदर्शिता का मुद्दा बताते हुए गंभीरता से जांच की अपील की।
Bihar Politics: सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग पर दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप
एनडीए की ओर से पहले जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने राबड़ी आवास में तहखाना होने और रात में सामान निकालने पर सवाल उठाए थे। उन्होंने खुदाई की मांग तक कर दी थी। राजद ने इसे बदनामी की साजिश बताया। यह बंगला लालू परिवार का राजनीतिक केंद्र रहा है, जहां 20 साल से अधिक समय तक वे रहे। अब शिफ्टिंग के साथ विवाद नए मोड़ पर पहुंच गया है।
बिहार की सियासत में सरकारी बंगलों का मुद्दा पुराना है, लेकिन यह विवाद दोनों पक्षों के लिए आरोप-प्रत्यारोप का नया हथियार बन गया है। विभाग की ओर से अभी कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।
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