India Anti-Terror Action: भारत ने एक बार फिर यह साबित किया है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति “शून्य सहनशीलता” की है। दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए विस्फोट से जुड़े जैश-ए-मुहम्मद (JeM) मॉड्यूल का पर्दाफाश कर सुरक्षा एजेंसियों ने आतंक के खिलाफ बड़ी जीत हासिल की है। इस कार्रवाई में करीब 3000 किलो विस्फोटक सामग्री ज़ब्त की गई है, जो किसी भी बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए पर्याप्त थी।
यह सफलता न केवल सुरक्षा एजेंसियों की दक्षता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि भारत अब किसी भी आतंकी मंसूबे को कठोरता से कुचलने के लिए पूरी तरह तैयार है।
लाल किले के पास धमाका और खुला बड़ा नेटवर्क
10 नवंबर 2025 की शाम 6:55 बजे, दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए धमाके ने सभी को चौंका दिया।
पहली नज़र में यह एक सामान्य विस्फोट लगा, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर यह मामला जैश-ए-मुहम्मद से जुड़े आतंकी नेटवर्क तक जा पहुँचा।
जांच में सामने आया कि विस्फोट में इस्तेमाल की गई कार फरीदाबाद में सक्रिय एक बड़े आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी थी। यह नेटवर्क डॉक्टरों और छात्रों के भेष में काम कर रहा था।
श्रीनगर से शुरू हुई कड़ी, फरीदाबाद में खत्म हुई
यह कहानी 19 अक्टूबर 2025 से शुरू हुई, जब श्रीनगर के नौगाम पुलिस चौकी क्षेत्र में कुछ आपत्तिजनक पोस्टर मिले।
एफआईआर दर्ज हुई, और जांच के दौरान मौलवी इरफान अहमद वाघे (शोपियां) व ज़मीर अहमद (गांदरबल) को गिरफ्तार किया गया।
इसके बाद 5 नवंबर को डॉ. अदील को सहारनपुर से पकड़ा गया।
फिर 7 नवंबर को अनंतनाग अस्पताल से AK-56 रायफलें व गोला-बारूद ज़ब्त हुए।
8 नवंबर को फरीदाबाद के अल-फला मेडिकल कॉलेज से और हथियार बरामद हुए।
यहीं से सामने आया एक नाम — डॉ. मुज़म्मिल, जो अल-फला कॉलेज में ही कार्यरत था।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह पूरा मॉड्यूल जैश-ए-मुहम्मद के इशारे पर काम कर रहा था, जो मेडिकल नेटवर्क के नाम पर आतंक फैला रहा था।
सबसे बड़ी बरामदगी: 3000 किलो विस्फोटक और बम सामग्री
10 नवंबर को सुरक्षा एजेंसियों ने फरीदाबाद के धौज और धेरा कॉलोनी में छापेमारी की।
यहाँ से जो मिला, उसने सभी को स्तब्ध कर दिया —
- हफीज़ मोहम्मद इश्तियाक, (मेवात निवासी व अल-फला मस्जिद का इमाम) के घर से
2563 किलो विस्फोटक पदार्थ बरामद हुआ। - साथ ही 358 किलो बारूद, डेटोनेटर और टाइमर भी जब्त हुए।
इस तरह कुल करीब 3000 किलो विस्फोटक और बम सामग्री जब्त की गई।
फिलहाल, मॉड्यूल से जुड़ा डॉ. उमर फरार है — वही कार चला रहा था जिसमें लाल किले के पास विस्फोट हुआ था।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह धमाका या तो पूर्व-नियोजित था, या एजेंसियों की दबिश से घबराकर हुआ एक्सीडेंटल ब्लास्ट।
सरकार की त्वरित कार्रवाई: NIA को सौंपी जांच
विस्फोट की सूचना मिलते ही गृह मंत्री अमित शाह ने नियंत्रण संभाला।
मुख्य घटनाक्रम:
- 6:55 PM – लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास धमाका
- 7:15 PM – गृह मंत्री ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से बातचीत की
- 9:00 PM – गृह मंत्री ने मीडिया से बात की, प्रधानमंत्री ने जानकारी ली
- 9:30 PM – गृह मंत्री एलएनजेपी अस्पताल पहुँचे, घायलों से मुलाकात
- 10:20 PM – अमित शाह ने घटना स्थल का निरीक्षण किया
- 11 नवंबर सुबह – NSG, NIA, IB, दिल्ली पुलिस व गृह सचिव के साथ दो उच्चस्तरीय बैठकें
- दोपहर 2:30 बजे – जांच औपचारिक रूप से NIA को सौंपी गई
फॉरेंसिक टीमों ने डीएनए सैंपल, विस्फोटक अवशेष और अन्य साक्ष्य जुटा लिए हैं।
आधुनिक तकनीक और एजेंसियों की तत्परता
इस मामले में भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने दिखाया कि कैसे आधुनिक तकनीक और आसूचना नेटवर्क के तालमेल से आतंक को कुचला जा सकता है।
फर्जी पहचान, मेडिकल कॉलेज और धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल करने वाले इस नेटवर्क को पकड़ना आसान नहीं था — लेकिन डिजिटल सर्विलांस और मानवीय इंटेलिजेंस (Human Intelligence) ने इसे संभव बनाया।
यह सफलता भारत के “नए युग के काउंटर-टेरर मॉडल” की झलक है — जो तेज़, समन्वित और प्रमाण-आधारित है।
ByNews-View: शोर नहीं, सटीकता – भारत की नई सुरक्षा नीति का चेहरा
भारत की सुरक्षा एजेंसियों की यह सफलता सिर्फ एक मॉड्यूल ध्वस्त करने की कहानी नहीं है,
यह उस “संतुलन और सटीकता” की झलक है जिससे भारत आतंक के खिलाफ लड़ रहा है।
यह घटना बताती है कि भारत अब भावनाओं से नहीं,
रणनीति, विवेक और आधुनिकता से जवाब देता है।
लोकतंत्र की असली ताकत यही है —
जहाँ डर के सामने नहीं झुका जाता, बल्कि कानून और साहस से जवाब दिया जाता है।
इस कार्रवाई से भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है —
आतंक का जवाब गोली से नहीं, कानून और संकल्प से दिया जाएगा।
लाल किला भारत की अस्मिता और स्वतंत्रता का प्रतीक है।
उस पर हमला करने की कोशिश भारत के गौरव पर प्रहार के समान है —
और भारत ने दिखा दिया कि ऐसा कोई भी प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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