Operation Pimple: भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के निकट घुसपैठ की एक बड़ी साजिश को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया। ऑपरेशन ‘पिंपल’ के तहत सतर्क जवानों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया। फिलहाल इलाके में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें हथियारों और गोला-बारूद की बरामदगी की संभावना जताई जा रही है।
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Operation Pimple: खुफिया सूचना पर त्वरित कार्रवाई
चिनार कॉर्प्स के आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल से शनिवार सुबह 7:10 बजे जारी पोस्ट में बताया गया कि 7 नवंबर को खुफिया एजेंसियों से प्राप्त विशिष्ट जानकारी के आधार पर संयुक्त अभियान शुरू किया गया। पोस्ट के अनुसार, “सतर्क सैनिकों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और आतंकवादियों को चुनौती दी। जवाब में आतंकवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। संपर्क स्थापित होने के बाद उन्हें घेर लिया गया और ऑपरेशन को आगे बढ़ाया गया।”
सुबह 8:15 बजे अपडेट में चिनार कॉर्प्स ने सूचित किया, “चल रहे अभियान में सुरक्षा बलों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया है। इलाके की तलाशी जारी है।” सेना के सूत्रों ने पुष्टि की कि यह ऑपरेशन पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से घुसपैठ की कोशिशों को रोकने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया था।
Operation Pimple: कुपवाड़ा घुसपैठ का पुराना हॉटस्पॉट
कुपवाड़ा जिला एलओसी से सटा हुआ है और पिछले कई दशकों से आतंकवादी घुसपैठ का प्रमुख रास्ता रहा है। ऊंचे पहाड़, घने जंगल और दुर्गम इलाके आतंकवादियों के लिए छिपने की सुविधा प्रदान करते हैं। खुफिया सूत्रों का मानना है कि मार गिराए गए आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा (LeT) या जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे पाकिस्तान समर्थित संगठनों से जुड़े हो सकते हैं। ये संगठन सर्दियों में बर्फबारी शुरू होने से पहले अधिक से अधिक घुसपैठिए भेजने की होड़ में रहते हैं ताकि वसंत में आतंकी गतिविधियां तेज की जा सकें।
Operation Pimple: 2025 में बढ़ती घुसपैठ की कोशिशें
इस साल कुपवाड़ा और बारामूला सेक्टरों में घुसपैठ की कई कोशिशें नाकाम की जा चुकी हैं। सेना के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से नवंबर तक LOC पर 20 से अधिक घुसपैठ के प्रयास विफल किए गए। इनमें से अधिकांश कोशिशें केरन, माछिल और तंगधार सेक्टरों में हुईं। विशेषज्ञों का कहना है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद, जिसमें भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे, सीमा पर तनाव चरम पर है। इसके जवाब में पाकिस्तानी सेना और आतंकी संगठन घुसपैठ बढ़ाने की रणनीति अपना रहे हैं।
Operation Pimple: ड्रोन और खुफिया नेटवर्क की भूमिका
ऑपरेशन ‘पिंपल’ की सफलता में भारतीय सेना के उन्नत ड्रोन निगरानी और मजबूत खुफिया नेटवर्क की अहम भूमिका रही। हेरॉन और सर्चर Mk-II जैसे ड्रोनों ने रियल-टाइम इमेजरी प्रदान की, जिससे संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाया गया। इसके अलावा, स्थानीय मुखबिरों और तकनीकी इंटेलिजेंस (SIGINT) ने सटीक लोकेशन मुहैया कराई। सेना ने इलाके में थर्मल इमेजिंग और नाइट विजन उपकरणों का भी भरपूर इस्तेमाल किया।
सर्च ऑपरेशन में क्या मिल सकता है?
मार गिराए गए आतंकवादियों के पास से AK-47 राइफलें, ग्रेनेड, पाकिस्तानी मुद्रा और पीओके के नक्शे बरामद होने की संभावना है। सेना के जवान ऊंचाई वाले इलाकों में गुफाओं और प्राकृतिक आश्रय स्थलों की भी तलाशी ले रहे हैं। अगर कोई और घुसपैठिया छिपा हुआ है, तो उसे भी जल्द पकड़ने की कोशिश की जा रही है।
सर्दियों की चुनौती और सेना की तैयारी
सर्दियों में LOC पर बर्फबारी घुसपैठ को मुश्किल बनाती है, लेकिन आतंकी संगठन दिसंबर से पहले अधिकतम घुसपैठिए भेजने की कोशिश करते हैं। भारतीय सेना ने इसके जवाब में ‘विंटर स्ट्रैटेजी’ लागू की है, जिसमें अतिरिक्त चौकियां, हीटेड बंकर और हाई-एल्टीट्यूड ड्रोन तैनात किए गए हैं। साथ ही, क्विक रिएक्शन फोर्स (QRF) को 24×7 अलर्ट पर रखा गया है।
स्थानीय लोगों का सहयोग
कुपवाड़ा के ग्रामीणों ने भी सेना का भरपूर साथ दिया। कई गांवों में ‘विलेज डिफेंस कमेटी’ (VDC) सक्रिय हैं, जो संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत देते हैं। सेना ने स्थानीय युवाओं को हथियार प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए आतंकवाद के खिलाफ मजबूत किया है।
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