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Saturday, October 3, 2026
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अमेरिका में वीजा नियम सख्त: डायबिटीज, मोटापा या हृदय रोग से पीड़ितों को इनकार का खतरा

Visa Rules: अमेरिका वीजा को लेकर ट्रंप प्रशासन ने एक नई गाइडलाइन जारी की है। इसके अनुसार अगर किसी विदेशी नागरिक को डायबिटीज, मोटापा, दिल की बीमारी या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं, तो उसे वीजा देने से इनकार किया जा सकता है।

Visa Rules: अमेरिकी ट्रंप प्रशासन ने वीजा नीतियों में एक बड़ा बदलाव किया है, जिससे विदेशी नागरिकों के लिए अमेरिका पहुंचना और मुश्किल हो गया है। नई गाइडलाइन के तहत डायबिटीज, मोटापा, हृदय रोग जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं वाले आवेदकों को वीजा देने से इनकार किया जा सकता है। इस निर्देश में अमेरिकी विदेश विभाग (स्टेट डिपार्टमेंट) ने कहा है कि ऐसी बीमारियां भविष्य में आवेदक को ‘पब्लिक चार्ज’ (यानी सरकारी संसाधनों पर बोझ) बना सकती हैं। यह नीति सभी प्रकार के वीजा पर लागू है, लेकिन ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) आवेदकों पर इसका प्रभाव सबसे ज्यादा पड़ेगा।

Visa Rules: इलाज का खर्च बनेगा आधार

परंपरागत रूप से वीजा प्रक्रिया में केवल संक्रामक रोगों (जैसे तपेदिक) और टीकाकरण की जांच होती थी, लेकिन नई गाइडलाइन गैर-संक्रामक बीमारियों को भी शामिल करती है। विदेश विभाग के केबल में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि हृदय रोग, श्वसन संबंधी बीमारियां, कैंसर, डायबिटीज, मेटाबोलिक विकार, न्यूरोलॉजिकल रोग और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज लाखों डॉलर का खर्चा मांग सकता है। मोटापे को भी जोर देकर कहा गया है कि यह अस्थमा, स्लीप एप्निया और उच्च रक्तचाप जैसी जटिलताओं का कारण बन सकता है, जो लंबे समय तक महंगे उपचार की जरूरत पैदा करता है।

Visa Rules: दुनिया की 10% आबादी डायबिटीज से ग्रस्त

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया की 10% आबादी डायबिटीज से ग्रस्त है, जबकि हृदय रोग वैश्विक मौतों का प्रमुख कारण है। गाइडलाइन में वीजा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे आवेदक के स्वास्थ्य इतिहास के आधार पर अनुमान लगाएं कि क्या वह अमेरिका में रहते हुए सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं (जैसे मेडिकेड) पर निर्भर हो सकता है। यह बदलाव ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की आक्रामक इमिग्रेशन नीति का हिस्सा है, जो अनधिकृत प्रवासियों को निर्वासित करने और नए आव्रजकों को हतोत्साहित करने पर केंद्रित है।

Visa Rules: वीजा इंटरव्यू में नए सवाल

निर्देश के मुताबिक, वीजा अधिकारी अब आवेदक से यह पूछेंगे कि क्या वह अपनी बीमारी का इलाज बिना सरकारी सहायता के कर पाएगा? क्या उसके पास जीवन भर के चिकित्सा खर्च उठाने की वित्तीय क्षमता है? इसी तरह, परिवार के सदस्यों (जैसे बच्चों या बुजुर्ग माता-पिता) के स्वास्थ्य पर भी सवाल उठेंगे। उदाहरण के लिए, क्या कोई आश्रित विकलांगता, पुरानी बीमारी या विशेष जरूरतों से ग्रस्त है, जिससे आवेदक नौकरी नहीं रख पाएगा? यह मूल्यांकन आवेदक की आय, बीमा कवरेज और रोजगार संभावनाओं पर आधारित होगा।

केबल में कहा गया है, “आवेदक के स्वास्थ्य को ध्यान में रखें। कुछ चिकित्सा स्थितियां—हृदय रोग, श्वसन रोग, कैंसर, डायबिटीज आदि—हजारों डॉलर का खर्चा मांग सकती हैं।” इससे पहले, पब्लिक चार्ज नियम मुख्य रूप से आर्थिक निर्भरता पर केंद्रित था, लेकिन अब स्वास्थ्य को इसका प्रमुख घटक बना दिया गया है।

Visa Rules: पूर्वाग्रह और गलत फैसलों का खतरा

इमिग्रेशन विशेषज्ञों ने इस नीति पर गहरी चिंता जताई है। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी की इमिग्रेशन वकील सोफिया जेनोवेस ने कहा, “डायबिटीज या हृदय स्वास्थ्य इतिहास को ध्यान में रखना काफी विस्तृत है। वीजा अधिकारी चिकित्सकीय प्रशिक्षण नहीं रखते, इसलिए वे व्यक्तिगत धारणाओं या पूर्वाग्रहों से प्रभावित हो सकते हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि यह नीति डॉक्टरों को भी आवेदकों के भविष्य के चिकित्सा खर्च और रोजगार क्षमता का अनुमान लगाने के लिए प्रोत्साहित करती है, जो अवैज्ञानिक है।

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