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Tuesday, March 3, 2026
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हरिद्वार के बाद अब बाराबंकी में बड़ा हादसा: महादेव मंदिर में भगदड़, दो श्रद्धालुओं की मौत 29 घायल

Stampede in Temple: हरिद्वार के बाद अब यूपी के बाराबंकी में एक बड़ा हादसा हो गया। आधी रात को जिले के हैदरगढ़ क्षेत्र स्थित पौराणिक औसानेश्वर महादेव मंदिर में भगदड़ मच जाने की वजह से दो लोगों की मौत हो गई है।

Stampede in Temple: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ क्षेत्र स्थित पौराणिक औसानेश्वर महादेव मंदिर में रविवार रात एक बड़ा हादसा हो गया। सावन के तीसरे सोमवार को जलाभिषेक के लिए उमड़ी भारी भीड़ के बीच रात करीब 2 बजे करंट फैलने से भगदड़ मच गई, जिसमें दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 29 लोग घायल हो गए। घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

Stampede in Temple: सावन सोमवार की भीड़ में हुआ हादसा

औसानेश्वर महादेव मंदिर में हर सावन सोमवार को हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए एकत्र होते हैं। रविवार और सोमवार की दरमियानी रात 12 बजे के बाद जलाभिषेक की प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसी दौरान करीब 2 बजे अचानक मंदिर परिसर में करंट फैल गया, जिससे चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। लोग इधर-उधर भागने लगे, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। करंट के झटके से दो श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई श्रद्धालु गंभीर रूप से झुलस गए और जमीन पर गिर पड़े।

Stampede in Temple: बंदर की वजह से टूटा तार, फैला करंट

जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने बताया कि घटना के पीछे बंदर की गतिविधि प्रमुख कारण रही। एक बंदर मंदिर परिसर के ऊपर बिजली के तार पर कूद गया, जिससे तार टूटकर मंदिर के टिन शेड पर गिर गया और वहां करंट फैल गया। करंट लगते ही भगदड़ मच गई और अफरातफरी के बीच कई लोग करंट की चपेट में आ गए।

सीएम योगी ने जताया दुख

बाराबंकी में करंट लगने की घटना पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका संज्ञान लिया और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचने और राहत कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने घायलों के समुचित इलाज के दिए निर्देश। सीएमओ ने एक्स पर पोस्ट कर यह जानकारी दी है।

Stampede in Temple: प्रशासनिक अधिकारियों की तत्परता

घटना की सूचना मिलते ही डीएम शशांक त्रिपाठी, एसपी अर्पित विजयवर्गीय और अन्य प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंच गए। सभी घायलों को एंबुलेंस के जरिए हैदरगढ़ और त्रिवेदीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। गंभीर रूप से घायलों को बाराबंकी जिला अस्पताल रेफर किया गया है।

मंदिर परिसर में पहले से मौजूद पुलिस बल को तत्काल बढ़ा दिया गया और स्थानीय प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में लाने में जुट गया। जिलाधिकारी ने कहा कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में और सामान्य है। श्रद्धालु दर्शन-पूजन शांतिपूर्वक कर रहे हैं।

450 साल पुराना मंदिर, सावन में उमड़ती है भीड़

औसानेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास काफ़ी पुराना है। पुरातत्व विभाग के अनुसार, यह मंदिर लगभग 450 वर्ष पुराना है और ढाई एकड़ क्षेत्र में फैला है। सावन के पवित्र महीने में यहां श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है, जो जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए दूर-दराज़ से पहुंचते हैं। हादसे के समय मंदिर परिसर में अनुमानतः हजारों की भीड़ मौजूद थी। प्रशासन द्वारा इस समय भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस बल और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई थी, लेकिन करंट फैलने की अप्रत्याशित घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती में डाल दिया।

हरिद्वार की घटना के बाद फिर करंट से भगदड़

गौरतलब है कि इससे ठीक एक दिन पहले, रविवार को हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में भी करंट फैलने की अफवाह से भगदड़ मच गई थी, जिसमें 8 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। वहां भी सावन की भारी भीड़ थी और अफवाह के चलते लोग एक-दूसरे पर चढ़ते चले गए। इस तरह की लगातार हो रही घटनाओं ने धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन और बिजली व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हादसे की जांच शुरू, मंदिर में पूजा जारी

बाराबंकी हादसे की जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि विद्युत विभाग और मंदिर प्रबंधन से पूछताछ की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल मंदिर परिसर में सामान्य स्थिति बहाल हो चुकी है और श्रद्धालु नियमित तरीके से दर्शन-पूजन कर रहे हैं।

बाराबंकी के औसानेश्वर महादेव मंदिर में हुई इस दुर्घटना ने सावन में धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा तैयारियों पर नए सिरे से सोचने को मजबूर कर दिया है। लगातार दो दिनों में दो बड़े मंदिरों में करंट से भगदड़ की घटनाएं होना किसी चेतावनी से कम नहीं। अब जरूरत है कि प्रशासन और मंदिर प्रबंधन मिलकर बिजली सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को लेकर कड़े इंतजाम करें, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था सुरक्षित रह सके।

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