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जस्टिस बी.आर. गवई ने ली भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ, पीएम मोदी ने दी बधाई

Justice BR Gavai: जस्टिस बीआर गवई ने बुधवार को भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ले ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जस्टिस बीआर गवई को बधाई दी है।

Justice BR Gavai: देश के सर्वोच्च न्यायालय को नया नेतृत्व मिल गया है। न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई ने बुधवार, 14 मई 2025 को भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

Justice BR Gavai: पीएम मोदी ने दी जस्टिस बी.आर. गवई को बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जस्टिस गवई को उनके कार्यभार ग्रहण करने पर शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुआ। उन्हें उनके कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं।

Justice BR Gavai: जस्टिस गवई ने ली 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ

राष्ट्रपति कार्यालय ने भी इस अवसर की तस्वीरें साझा करते हुए कहा, न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई ने राष्ट्रपति भवन में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। वहीं, उपराष्ट्रपति कार्यालय ने भी समारोह की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ आज राष्ट्रपति भवन में भारत के 52वें माननीय मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई के शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित रहे।

Justice BR Gavai: दूसरा दलित CJI बनने का गौरव

जस्टिस गवई भारत के इतिहास में दूसरे दलित मुख्य न्यायाधीश बने हैं। इससे पहले जस्टिस के.जी. बालाकृष्णन ने 2007 में यह पद संभाला था। जस्टिस गवई की नियुक्ति को सामाजिक न्याय और न्यायपालिका में विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह देश के उस संविधानिक आदर्श को सशक्त करता है जिसमें सभी वर्गों को न्यायपालिका में समान भागीदारी की बात कही गई है।

संजीव खन्ना का कार्यकाल रहा छोटा

जस्टिस गवई ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना का स्थान लिया है, जिनका कार्यकाल 13 मई 2025 को समाप्त हुआ। जस्टिस खन्ना का कार्यकाल महज सात महीने का रहा, लेकिन इस दौरान उन्होंने कई अहम मामलों की सुनवाई की और न्यायिक प्रक्रियाओं को तेज़ करने पर बल दिया।

गवई का न्यायिक सफर

न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और 16 मार्च 1985 को वकालत की शुरुआत की। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व महाधिवक्ता राजा एस. भोंसले के साथ कार्य किया। इसके बाद 1987 से 1990 तक उन्होंने बॉम्बे उच्च न्यायालय में स्वतंत्र वकालत की। विशेष रूप से नागपुर पीठ के समक्ष उन्होंने प्रशासनिक, संवैधानिक और नागरिक मामलों में लंबा अनुभव अर्जित किया।

जुलाई 2000 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और नवंबर 2001 में वे स्थायी न्यायाधीश बने। 2019 में जस्टिस गवई सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त किए गए। उन्हें संवैधानिक कानून, सामाजिक न्याय और प्रशासनिक कानून में गहरी समझ के लिए जाना जाता है।

आगे की जिम्मेदारियां

भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस गवई के सामने कई अहम चुनौतियां हैं, जिनमें न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना, लंबित मामलों की संख्या कम करना, डिजिटल अदालतों की सुविधा को मजबूत करना और न्याय को गरीब व वंचित वर्गों तक सुलभ बनाना शामिल है।

उनका कार्यकाल 24 नवंबर 2025 तक रहेगा। इस दौरान वे कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की अगुवाई कर सकते हैं। उनके नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट से न्यायिक सुधारों की गति तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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