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Friday, April 3, 2026
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Delhi Riots: कानून मंत्री पर कानून का शिकंजा, कपिल मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश, AAP ने की गिरफ्तारी की मांग

Delhi Riots: दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की जांच करने का आदेश दिया है।

Delhi Riots: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में भाजपा नेता कपिल मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद आम आदमी पार्टी (आप) ने कपिल मिश्रा की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। पार्टी की प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि दिल्ली पुलिस को भाजपा नेता को तुरंत गिरफ्तार करना चाहिए क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर दंगों को भड़काया, जिसके परिणामस्वरूप 53 लोगों की मौत हुई और करोड़ों रुपये की संपत्ति नष्ट हो गई।

Delhi Riots: पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप

आप के दिल्ली संयोजक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पांच साल बाद कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है, जबकि यह काम पहले ही दिल्ली पुलिस को करना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने जानबूझकर कपिल मिश्रा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 24 से 26 फरवरी 2020 के बीच सांप्रदायिक दंगे हुए थे, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई थी और 500 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस दौरान कई घर, दुकानें और धार्मिक स्थल जला दिए गए थे। दंगों की जांच के दौरान कपिल मिश्रा के एक कथित भड़काऊ भाषण का वीडियो वायरल हुआ था, जिसे कई संगठनों ने हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

Delhi Riots: दिल्ली हाईकोर्ट में चला था वीडियो

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दंगों के समय कपिल मिश्रा की हेट स्पीच के वीडियो पूरे देश में प्रसारित हो रहे थे। दिल्ली हाईकोर्ट के तत्कालीन जस्टिस एस. मुरलीधर ने अपनी अदालत में चार वीडियो चलवाए थे, जिसमें कपिल मिश्रा कथित तौर पर लोगों को उकसाते नजर आ रहे थे। इसी भाषण के बाद इलाके में हिंसा भड़क गई थी।

26 फरवरी 2020 को दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त प्रवीण रंजन को बुलाकर पूछा था कि अब तक कपिल मिश्रा के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई। पुलिस ने जवाब दिया कि वीडियो की जांच की जा रही है। इस पर जस्टिस मुरलीधर ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था, “जब पूरा शहर जल जाएगा, तब आप एफआईआर दर्ज करेंगे?” उसी रात जस्टिस मुरलीधर का तबादला कर दिया गया और उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट भेज दिया गया।

Delhi Riots: पांच साल बाद भी पुलिस ने नहीं की कार्रवाई

27 फरवरी 2020 को कोर्ट ने पुलिस को चार हफ्तों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। हालांकि, फरवरी 2025 तक दिल्ली पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कपिल मिश्रा के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला। इस पर “आप” ने पुलिस पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

अब, राउस एवेन्यू कोर्ट के जज वैभव चौरसिया ने मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। आम आदमी पार्टी को आशंका है कि कहीं जज का भी तबादला न कर दिया जाए।

आप ने गिरफ्तारी की मांग की

आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार से मांग की है कि कपिल मिश्रा को मंत्री पद से तुरंत हटाया जाए और गिरफ्तार किया जाए। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अन्य दंगा आरोपियों की तरह मिश्रा को भी जेल भेजा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपने नेताओं को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, लेकिन कोर्ट के इस आदेश के बाद अब उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होना तय है।

भाजपा की प्रतिक्रिया

इस मामले पर भाजपा की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, पार्टी के कुछ नेताओं ने अनौपचारिक रूप से कहा है कि कपिल मिश्रा के खिलाफ यह आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। उन्होंने दावा किया कि मिश्रा ने कोई भड़काऊ बयान नहीं दिया था और दंगों के लिए सिर्फ उन्हें जिम्मेदार ठहराना गलत है।

न्याय की मांग

दिल्ली दंगों में मारे गए और प्रभावित हुए लोगों के परिजनों ने इस आदेश का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अगर शुरू में ही सही कार्रवाई की जाती तो शायद दंगे को टाला जा सकता था। अब देखना यह होगा कि दिल्ली पुलिस कोर्ट के इस आदेश का पालन करते हुए कब तक एफआईआर दर्ज करती है और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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