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Tuesday, March 24, 2026
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Donald Trump: डोनाल्ड ट्रंप ने भारत सहित ब्रिक्स देशों को दी सख्त चेतावनी, ‘डॉलर को स्वीकार करो, नहीं तो परिणाम भुगतने होंगे’

Donald Trump: डोनाल्ड ट्रंप ने को डी-डॉलराइजेशन के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट करते हुए ब्रिक्स देशों को सख्त चेतावनी दी।

Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ब्रिक्स देशों को एक कठोर चेतावनी दी, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर ब्रिक्स देशों ने अमेरिकी डॉलर को वैश्विक व्यापार में मुख्य मुद्रा के रूप में हटाने की कोशिश की, तो उनके निर्यात पर 100 प्रतिशत शुल्क (टैरिफ) लगा दिया जाएगा। इस बयान से एक बार फिर अमेरिकी डॉलर की स्थिति और वैश्विक वित्तीय प्रणाली पर ट्रंप का नजरिया उजागर हुआ है।

‘ऐसा किया तो 100 फीसदी टैरिफ लगाऊंगा’

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ब्रिक्स देशों को यह विचार छोड़ देना चाहिए कि वे अमेरिकी डॉलर से दूर जाने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह के विचार अब समाप्त हो चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर ये देश किसी नई मुद्रा को अमेरिकी डॉलर की जगह अंतरराष्ट्रीय व्यापार में लाने की कोशिश करेंगे, तो उन्हें अमेरिकी अर्थव्यवस्था से कोई भी व्यापारिक संबंध नहीं मिलेगा और उनके उत्पादों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाएंगे।

‘डॉलर को इग्नोर करने का खेल नहीं चलेगा…’

यह कोई पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने इस प्रकार की चेतावनी दी है। इससे पहले, नवंबर 2024 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद, उन्होंने इसी तरह की धमकी दी थी। ट्रंप का कहना था, हमें इन शत्रुतापूर्ण देशों से यह प्रतिबद्धता चाहिए कि वे नई ब्रिक्स मुद्रा नहीं बनाएंगे और न ही अमेरिकी डॉलर की जगह किसी अन्य मुद्रा का समर्थन करेंगे, क्योंकि ऐसा करने से उन्हें अमेरिकी बाजार से बाहर होना पड़ेगा।

ब्रिक्स देशों की डॉलर से मुक्त होने की कोशिश

ब्रिक्स (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) समूह के देशों ने कई वर्षों से अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता को कम करने के तरीके तलाशे हैं। ये देश डॉलर के बजाय अपनी-अपनी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। हाल ही में, इन देशों ने अपने व्यापारिक लेन-देन में डॉलर का स्थान लेने के लिए अपनी मुद्रा का इस्तेमाल करने की पहल की है।

हालांकि, इस समय तक ब्रिक्स के पास एक साझा मुद्रा नहीं है, लेकिन सदस्य देशों ने अपने व्यापार में डॉलर की जगह अपनी-अपनी मुद्राओं का इस्तेमाल करने की दिशा में काम किया है। इस कदम से अमेरिका के खिलाफ एक चुनौती उत्पन्न हो रही है, क्योंकि डॉलर अभी भी वैश्विक व्यापार और वित्तीय लेन-देन की प्रमुख मुद्रा के रूप में स्थापित है।

ट्रंप का रुख और अमेरिकी डॉलर की प्रमुखता

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कई बार अपनी पोस्ट और सार्वजनिक बयान में डॉलर के महत्व को रेखांकित किया है। उनका कहना है कि अमेरिकी डॉलर का स्थान बदलने की कोई संभावना नहीं है और जो भी देश इसकी चुनौती करेगा, उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

सुरक्षित निवेश का भी प्रतीक माना जाता है अमेरिकी डॉलर

अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती और डॉलर की वैश्विक भूमिका को देखते हुए ट्रंप का यह रुख समझा जा सकता है। अमेरिकी डॉलर न केवल व्यापारिक लेन-देन की मुख्य मुद्रा है, बल्कि इसे सुरक्षित निवेश का भी प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा, डॉलर का इस्तेमाल वैश्विक वित्तीय संस्थाओं, बैंकों और केंद्रीय बैंकों द्वारा भी किया जाता है, जो अमेरिकी डॉलर को एक महत्वपूर्ण आर्थिक संपत्ति बनाता है।

ब्रिक्स देशों के लिए चुनौती

ब्रिक्स देशों के लिए ट्रंप की यह चेतावनी एक बड़ी चुनौती बन सकती है। ये देश लंबे समय से अमेरिकी डॉलर की निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक उपायों पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, किसी नई मुद्रा को अपनाने के लिए ब्रिक्स देशों को गंभीर आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबद्धताएं करनी होंगी, जिनके लिए इन देशों को अपने घरेलू वित्तीय ढांचे और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संबंधों का पुनर्निर्माण करना होगा।

हालांकि, अभी तक ब्रिक्स देशों ने किसी नई साझा मुद्रा की घोषणा नहीं की है, लेकिन यह बात साफ है कि वे अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देने की दिशा में सोच रहे हैं। ट्रंप की चेतावनी से यह साफ है कि अमेरिका इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है और किसी भी कोशिश को कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के रूप में जवाब देगा।

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