Trump Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “गहरा निराशाजनक” और “शर्मनाक” करार दिया। कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया था, जिसमें उन्होंने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया था। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कोर्ट के फैसले पर हमला बोला और नए टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिससे वैश्विक व्यापार में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है।
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Trump Tariffs: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स की लिखित राय में फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति को IEEPA के तहत टैरिफ लगाने का ऐसा व्यापक अधिकार नहीं है। यह कानून विदेशी खतरे के दौरान आपातकालीन आर्थिक कार्रवाई के लिए है, न कि सामान्य व्यापार नीति के लिए। कोर्ट ने कहा कि टैरिफ लगाना कांग्रेस का विशेषाधिकार है, और ट्रंप ने अपनी शक्तियों का अतिक्रमण किया। फैसले में जस्टिस एमी कोनी बैरेट और नील गॉर्सच (दोनों ट्रंप द्वारा नियुक्त) ने भी बहुमत में शामिल होकर ट्रंप को झटका दिया। तीन असहमति जताने वाले जस्टिस थे। इस फैसले से ट्रंप के “लिबरेशन डे” टैरिफ रद्द हो गए, जिनमें कनाडा, मैक्सिको पर 25%, चीन पर 10% और अन्य देशों पर न्यूनतम 10% टैरिफ शामिल थे। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे 130-175 अरब डॉलर के टैरिफ रिफंड का रास्ता खुल सकता है।
Trump Tariffs: ट्रंप की आक्रामक प्रतिक्रिया
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट का फैसला बेहद निराशाजनक है। मुझे कोर्ट के कुछ सदस्यों पर शर्म आती है। वे हमारे देश के हित में सही काम करने का साहस नहीं रखते।” उन्होंने कोर्ट पर विदेशी हितों और “छोटे राजनीतिक आंदोलन” से प्रभावित होने का आरोप लगाया। ट्रंप ने कहा, “वे घमंडी, अज्ञानी और बहुत शोर मचाने वाले हैं। वे डरते हैं, इसलिए सही फैसला नहीं लेते।” उन्होंने अपनी चुनावी जीत का जिक्र करते हुए कहा कि लाखों वोटों से मिली भारी बहुमत वाली जीत को धांधली के बावजूद कोई नहीं रोक सका। ट्रंप ने कोर्ट को “विदेशी हितों के सामने झुकने” वाला बताया और कहा कि फैसले से उनकी ताकत बढ़ी है।
Trump Tariffs: नए टैरिफ की धमकी और घोषणा
ट्रंप ने फैसले को चुनौती देते हुए कहा, “कोर्ट के फैसले गलत हैं, लेकिन इससे फर्क नहीं पड़ता। हमारे पास और विकल्प हैं। हम किसी भी देश से व्यापार बंद कर सकते हैं।” उन्होंने घोषणा की कि सभी देशों पर 10% अतिरिक्त ग्लोबल टैरिफ लगाया जाएगा, जो ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 की धारा 122 के तहत अस्थायी रूप से लागू होगा। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि उन्होंने ओवल ऑफिस से यह टैरिफ साइन किया है, जो तुरंत प्रभावी होगा। उन्होंने चेतावनी दी, “जो लोग इस फैसले से खुश हैं, वे ज्यादा दिन खुश नहीं रहेंगे। अब और सख्त कदम उठाए जाएंगे। हम और ज्यादा पैसे वसूलेंगे।”
Trump Tariffs: राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव
यह फैसला ट्रंप की दूसरी पारी में उनकी आर्थिक नीति को बड़ा झटका है, जो “अमेरिका फर्स्ट” पर आधारित है। डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन्स ने इसे अलग-अलग शक्तियों के संतुलन की जीत बताया। छोटे व्यवसायों और उपभोक्ताओं ने राहत जताई, क्योंकि टैरिफ से कीमतें बढ़ी थीं। वैश्विक व्यापार साझेदारों में मिश्रित प्रतिक्रिया आई—कुछ ने स्थिरता की मांग की, तो कुछ ने जवाबी कदमों की तैयारी शुरू कर दी। ट्रंप के नए 10% टैरिफ से बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है, क्योंकि यह कांग्रेस की मंजूरी के बिना 150 दिनों तक चलेगा।
ट्रंप ने कहा कि यह मामला आर्थिक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और “अमेरिका को फिर महान बनाने” का लक्ष्य अटल है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह घटनाक्रम ट्रंप की टैरिफ नीति को नए रास्तों पर ले जाएगा, लेकिन कानूनी चुनौतियां जारी रह सकती हैं।
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