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उज्जैन में शुरू होगा भव्य ‘विक्रमोत्सव 2026’: सम्राट विक्रमादित्य की विरासत को एक माह तक समर्पित मेगा उत्सव

Vikramotsav 2026: विक्रमोत्सव का शुभारंभ 15 फरवरी को होगा। इस दिन शिवरात्रि मेलों, भव्य कलश यात्रा और कलाकारों के समूह द्वारा प्रस्तुत संगीतमय प्रस्तुति ‘शिवोहम’ के साथ उत्सव का आगाज होगा।

Vikramotsav 2026: मध्य प्रदेश की प्राचीन धार्मिक नगरी उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य के सम्मान में आयोजित होने वाला विक्रमोत्सव 2026 इस वर्ष 15 फरवरी से शुरू होकर 19 मार्च तक चलेगा। यह एक माह से अधिक समय तक चलने वाला भव्य उत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक गौरव, बौद्धिक विमर्श और ऐतिहासिक गौरव का अनूठा संगम होगा। मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार (27 जनवरी 2026) को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद सभी कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा जारी कर दी है।

Vikramotsav 2026: शिवरात्रि मेलों और कलश यात्रा से शुरुआत

विक्रमोत्सव का शुभारंभ 15 फरवरी को होगा। इस दिन शिवरात्रि मेलों, भव्य कलश यात्रा और कलाकारों के समूह द्वारा प्रस्तुत संगीतमय प्रस्तुति ‘शिवोहम’ के साथ उत्सव का आगाज होगा। इसके बाद 16 से 25 फरवरी तक विक्रम थिएटर महोत्सव आयोजित होगा, जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित नाट्य कलाकार ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित नाटकों की प्रस्तुतियां देंगे।

Vikramotsav 2026: 26 से 28 के बीच अंतरराष्ट्रीय इतिहास सम्मेलन

26 से 28 फरवरी के बीच अंतरराष्ट्रीय इतिहास सम्मेलन, कठपुतली महोत्सव और अनुसंधान संगोष्ठी का आयोजन होगा। 28 फरवरी से 1 मार्च तक सम्राट विक्रमादित्य के युग में न्याय व्यवस्था, शासन प्रणाली और प्रशासनिक कौशल पर केंद्रित एक विशेष बौद्धिक सम्मेलन होगा। 7 मार्च को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देशभर के प्रसिद्ध कवि अपनी रचनाएं प्रस्तुत करेंगे।

Vikramotsav 2026: अंतरराष्ट्रीय पौराणिक फिल्म महोत्सव और अन्य आकर्षण

विक्रमोत्सव के दौरान 20 से अधिक देशों की प्रविष्टियों के साथ पौराणिक फिल्मों का अंतरराष्ट्रीय महोत्सव आयोजित होगा। वेद अंताक्षरी प्रतियोगिता, गुड़ी पड़वा के अवसर पर रामघाट और दत्त अखाड़ा में सूर्योदय पूजा जैसे धार्मिक आयोजन भी होंगे। ये कार्यक्रम उज्जैन की प्राचीन आस्था और सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करेंगे।

Vikramotsav 2026: अंतिम दिन, उज्जयिनी गौरव दिवस

उत्सव का समापन 19 मार्च को वर्ष प्रतिपदा और सृष्टि आरंभ दिवस के अवसर पर ‘उज्जयिनी गौरव दिवस’ के रूप में होगा। शिप्रा नदी के तट पर मुख्य समारोह में सम्राट विक्रमादित्य पुरस्कार का वितरण, विक्रम पंचांग 2082-83 का विमोचन, ‘अर्शा भारत’ के दूसरे संस्करण का लोकार्पण और भव्य नृत्य-नाट्य प्रस्तुति ‘महादेव की नदी कथा’ प्रमुख आकर्षण होंगे।

Vikramotsav 2026: मुख्यमंत्री के निर्देश, नई पीढ़ी को जोड़ने पर जोर

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि विक्रमोत्सव में सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व, न्याय, शासन, विज्ञान, खगोलशास्त्र, कालगणना और साहित्यिक योगदान के सभी आयामों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा, “भारतीय ज्ञान परंपराओं और सांस्कृतिक निरंतरता को मजबूत करने के लिए नई पीढ़ी को सम्राट विक्रमादित्य के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक योगदान से परिचित कराना जरूरी है।”

सीएम ने विशेष रूप से विज्ञान महाविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों को विक्रमोत्सव से जोड़ने के निर्देश दिए। इन संस्थानों में सम्राट विक्रमादित्य के वैज्ञानिक दृष्टिकोण, खगोल विज्ञान, गणितीय कालगणना और प्रशासनिक व्यवस्था पर आधारित विशेष व्याख्यान, प्रदर्शनियां और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।

उज्जैन की सांस्कृतिक राजधानी को नई पहचान

विक्रमोत्सव उज्जैन को वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक और बौद्धिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करेगा, बल्कि सम्राट विक्रमादित्य के युग की न्याय, समृद्धि और ज्ञान की परंपरा को समकालीन संदर्भ में जीवंत करेगा। सरकार का लक्ष्य है कि इस मेगा इवेंट से लाखों श्रद्धालु, पर्यटक, विद्वान और युवा जुड़ें और भारतीय सभ्यता की गौरवशाली विरासत से प्रेरित हों।

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