MP Tiger Death: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बाघों की मौतों पर गंभीर चिंता जताई है। राज्य में बाघों की मौतों में तेजी से बढ़ोतरी को देखते हुए कोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) को 25 फरवरी तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
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MP Tiger Death: 2025 में 54 बाघों की मौत, देश में सर्वाधिक
वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) में बताया गया कि वर्ष 2025 में मध्य प्रदेश में 54 बाघों की मौत हुई, जो देश में किसी एक वर्ष में सबसे अधिक है। यह संख्या प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत (1973) के बाद से सबसे ऊंची है। पिछले वर्षों की तुलना में 2022 में 43, 2023 में 45 और 2024 में 46 बाघ मरे थे। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि अधिकांश मौतें असामान्य हैं, जिनमें संगठित शिकार और बिजली के झटके प्रमुख कारण हैं।
MP Tiger Death: 2026 की शुरुआत में ही 10 बाघों की संदिग्ध मौत
सीनियर एडवोकेट आदित्य संघी ने कोर्ट में डेटा पेश करते हुए कहा कि 2026 के पहले महीने में ही 9 से 10 बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें से अधिकांश मौतें बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (BTR) और आसपास के क्षेत्रों में हुईं। कई मामलों में मौतें संदिग्ध परिस्थितियों में हुईं, जैसे बिजली का झटका या अन्य अस्वाभाविक कारण।
संघी ने कोर्ट को बताया कि वन विभाग अक्सर इन मौतों को ‘क्षेत्रीय झगड़े’ का नाम देकर असली समस्या छिपा रहा है। उन्होंने संगठित शिकार और बिजली के तारों से होने वाली मौतों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
MP Tiger Death: कोर्ट का सख्त रुख और निर्देश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायाधीश विनय सराफ की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और NTCA को 25 फरवरी तक जवाब दाखिल करने को कहा। साथ ही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर को विशेष रूप से विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया।
सरकार और NTCA ने बुधवार को जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा था, जिसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई 25 फरवरी तय की।
MP Tiger Death: बांधवगढ़ में सबसे अधिक मौतें
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व दुनिया में बाघों की सबसे अधिक घनत्व वाला क्षेत्र माना जाता है, लेकिन यहां हाल के महीनों में मौतों का सिलसिला जारी है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि वन अधिकारी संकट पर ‘सोए हुए’ हैं और एंटी-पोचिंग उपायों में लापरवाही बरत रहे हैं।
MP Tiger Death: बाघ संरक्षण पर बड़ा खतरा
मध्य प्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ कहा जाता है, लेकिन लगातार बढ़ती मौतें बाघ संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती बन गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो राज्य की बाघ आबादी पर गहरा असर पड़ सकता है।
कोर्ट का यह फैसला वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कदम है। अब 25 फरवरी को रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। अन्नदाता की तरह अन्नदाता नहीं, बल्कि अन्नदाता की तरह बाघों की रक्षा भी जरूरी है। यह संकट सिर्फ बाघों का नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का है।
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