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मोदी सरकार की ऐतिहासिक पहल: पहली बार आधिकारिक जातिगत गणना, सामने आई तारीख

Census: भारत में जातिगत जनगणना कब होगी, इसकी डेट अब सामने आ गई है। देश में जातीय जनगणना दो फेज में कराई जाएगी। इसका पहला चरण एक अक्टूबर 2026 से शुरू होगा। वहीं दूसरे चरण की शुरुआत एक मार्च 2027 से होगी।

Census: देश की लंबे समय से लंबित जनगणना और जातिगत गणना की प्रक्रिया आखिरकार तय हो गई है। 16 जून 2025 को जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत अधिसूचना जारी होते ही यह प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी। खास बात यह है कि इस बार जनगणना और जातिगत गणना एक साथ की जाएगी, जिससे देश की सामाजिक संरचना को बेहतर तरीके से समझने और योजनाओं को अधिक प्रभावी रूप से लागू करने में मदद मिलेगी। 1947 के बाद से जाति जनगणना नहीं हुई। जाति जनगणना की जगह कांग्रेस ने जाति सर्वे कराया, यूपीए सरकार में कई राज्यों ने राजनीतिक दृष्टि से जाति सर्वे किया है। जनगणना का विषय संविधान के अनुच्छेद 246 की केंद्रीय सूची की क्रम संख्या 69 पर अंकित है और यह केंद्र का विषय है।

Census: दो चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया

जनगणना प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी।

  • पहला चरण: यह चरण 1 फरवरी 2027 तक पूरा किया जाएगा। इसमें स्टाफ की नियुक्ति, प्रशिक्षण, फॉर्मेट तैयार करना और फील्ड वर्क की योजना शामिल होगी।
  • दूसरा चरण: फरवरी 2027 के अंत तक समाप्त होगा।
  • संदर्भ तिथि: 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि को जनगणना की संदर्भ तिथि माना जाएगा। उस समय देश की जनसंख्या, सामाजिक स्थिति, जातीय वितरण और अन्य आंकड़े दर्ज किए जाएंगे।
    इसके बाद, आंकड़ों को सार्वजनिक किया जाएगा और विभिन्न रिपोर्टें चरणबद्ध रूप से सामने आने लगेंगी।

Census: विशेष क्षेत्रों में पहले होगी जनगणना

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और विशेष भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्यों में जनगणना अन्य राज्यों से पहले पूरी की जाएगी। यहां अक्टूबर 2026 तक यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, ताकि मौसम की कठिनाइयों और दुर्गम इलाकों के कारण व्यवधान न आए।

Census: जातिगत गणना को मिली कैबिनेट की मंजूरी

इस बार जनगणना में एक ऐतिहासिक बदलाव यह होगा कि इसमें जातिगत आंकड़ों को भी शामिल किया जाएगा। इस संबंध में अप्रैल 2025 में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की थी कि कैबिनेट की राजनीतिक मामलों की समिति (Cabinet Committee on Political Affairs) ने आगामी जनगणना में जातिगत गणना को मंजूरी दे दी है। उन्होंने इसे सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए कहा कि यह प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न होगी।

जातिगत गणना की मांग और पृष्ठभूमि

जातिगत गणना की मांग कई वर्षों से विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा की जा रही थी। कांग्रेस, INDIA गठबंधन और क्षेत्रीय दलों ने बार-बार इसकी आवश्यकता जताई है। हाल ही में कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने जातिगत सर्वे कराया था, जिससे कुछ समुदायों में असंतोष भी देखा गया, खासतौर पर वोक्कालिगा और लिंगायत समाज में।

कोविड के कारण टली थी पिछली जनगणना

भारत में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। अगली जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे स्थगित करना पड़ा। यदि इसे तय समय पर पूरा किया गया होता, तो इसकी रिपोर्ट 2021 तक सार्वजनिक हो चुकी होती।

अपेक्षाएं और महत्व

जनगणना 2027 केवल जनसंख्या की गणना नहीं होगी, बल्कि यह देश के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को गहराई से समझने का माध्यम बनेगी।

  • वंचित वर्गों की पहचान
  • आरक्षण और सामाजिक न्याय से जुड़े निर्णयों के लिए डेटा
  • नीतियों के पुनर्गठन और समावेशी विकास के लिए आधार
  • वास्तविक सामाजिक और जातिगत स्थिति पर सटीक जानकारी

इस जनगणना से सरकार को समाज के सभी तबकों तक पहुंचने में मदद मिलेगी और योजनाओं को अधिक न्यायसंगत रूप से लागू किया जा सकेगा।

जनगणना 2027 एक ऐतिहासिक और नीतिगत रूप से महत्वपूर्ण घटना होने जा रही है। जातिगत आंकड़ों को जोड़ने का फैसला राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से दूरगामी असर डाल सकता है। इससे सामाजिक न्याय, समानता और विकास की दिशा में नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।

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