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चार मंजिला इमारत का हिस्सा ढहने से 14 की मौत, NDRF की बचाव कार्रवाई जारी

Building Collapse: पालघर जिले के विरार में एक अनधिकृत चार मंजिला इमारत का एक हिस्सा ढह गया। इसमें मां-बेटी समेत 14 लोगों की मौत हो गई और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया।

Building Collapse: महाराष्ट्र के पालघर जिले के वसई-विरार क्षेत्र में मंगलवार और बुधवार (27-28 अगस्त 2025) की दरमियानी रात को एक बड़ा हादसा हुआ, जब रामाबाई अपार्टमेंट नामक चार मंजिला इमारत का एक हिस्सा ढह गया। इस हादसे में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें एक मां-बेटी की जोड़ी भी शामिल है। एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल है, और कई अन्य के मलबे में फंसे होने की आशंका है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), वसई-विरार नगर निगम (वीवीएमसी) की अग्निशमन टीम और स्थानीय पुलिस बचाव कार्य में जुटी हुई है।

Building Collapse: हादसे का विवरण और प्रारंभिक जानकारी

यह हादसा मंगलवार रात करीब 12:05 बजे हुआ, जब नारंगी रोड पर स्थित रामाबाई अपार्टमेंट का पिछला हिस्सा पास के एक खाली चॉल पर ढह गया। यह इमारत 2012 में बनी थी और इसे वीवीएमसी द्वारा अनधिकृत और खतरनाक घोषित किया गया था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इमारत की खराब रखरखाव, पुरानी संरचना और मॉनसून की बारिश के कारण रिसाव ने इस हादसे को जन्म दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इमारत में पहले से ही दरारें थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। हादसे में मलबे में फंसे लोगों में से 11 को अब तक निकाला जा चुका है, जिनमें से दो, 24 वर्षीय आरोही ओमकार जोविल और उनकी एक वर्षीय बेटी उत्कर्षा जोविल, की मृत्यु हो गई।

Building Collapse: बचाव कार्य और चुनौतियां

एनडीआरएफ की दो टीमें, एक मुंबई से और दूसरी पालघर से, तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं। एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडर प्रमोद सिंह ने बताया कि संकरी गलियों के कारण भारी मशीनरी का उपयोग संभव नहीं था, जिसके चलते शुरुआती बचाव कार्य मैन्युअल रूप से किए गए। अब जेसीबी मशीनों और विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है और अनुमान है कि यह अगले दिन तक चल सकता है। पालघर की जिला कलेक्टर इंदु रानी जाखड़ ने कहा कि मलबे में अभी और लोगों के फंसे होने की आशंका है। आसपास की चॉलों को खाली कराकर निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है।

Building Collapse: पीड़ितों की स्थिति और सरकारी सहायता

मलबे से निकाले गए लोगों को विरार और नालासोपारा के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। मृतकों में लक्ष्मण किष्कु सिंह (26), दिनेश प्रकाश सपकाल (43), सुप्रिया निवालकर (38), और अर्णव निवालकर (11) शामिल हैं। हादसे ने कई परिवारों को बेघर कर दिया है। वीवीएमसी के सहायक आयुक्त गिल्सन गोंसाल्वेस ने बताया कि प्रभावित परिवारों को चंदनसर समाजमंदिर में अस्थायी रूप से ठहराया गया है, जहां भोजन, पानी और चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है।

जिम्मेदारी और कानूनी कार्रवाई

वीवीएमसी के अनुसार, रामाबाई अपार्टमेंट में कुल 50 फ्लैट थे, जिनमें से 12 ढह गए। इमारत को पहले ही खतरनाक घोषित किया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस ने वीवीएमसी की शिकायत पर इमारत के बिल्डर को गिरफ्तार कर लिया है। इस हादसे ने एक बार फिर स्थानीय प्रशासन की लापरवाही और भवन सुरक्षा नियमों की अनदेखी को उजागर किया है। सोशल मीडिया पर दावे किए गए हैं कि वीवीएमसी के पूर्व प्रमुख को भवन स्वीकृति में रिश्वतखोरी के लिए प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था, जो इस तरह के हादसों के पीछे गहरी सांठगांठ की ओर इशारा करता है।

सुरक्षा पर गंभीर सवाल

विरार हादसा भारत में पुरानी और अनधिकृत इमारतों की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाता है। मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में तेजी से हुए अनियोजित निर्माण और सुरक्षा जांच में देरी ने इस तरह के हादसों को बढ़ावा दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मॉनसून के दौरान भवनों में रिसाव और कमजोर संरचनाएं बड़े खतरे का कारण बनती हैं। हाल के वर्षों में बिहार में 12 पुलों का ढहना और गुजरात के मोरबी हादसे में 135 लोगों की मौत जैसे उदाहरण इस समस्या की गंभीरता को दर्शाते हैं।

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