Naxalites Surrender: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही जंग में सुरक्षाबलों को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। बुधवार, 27 अगस्त 2025 को, पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जनन अभियान के तहत 30 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें से 20 नक्सली इनामी थे, जिन पर कुल 81 लाख रुपये का इनाम घोषित था। यह सरेंडर छत्तीसगढ़ सरकार की नई पुनर्वास नीति और ‘नियद नेल्लानार’ योजना के प्रभाव का परिणाम माना जा रहा है, जिसने नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।
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Naxalites Surrender: आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का विवरण
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में कई बड़े नाम शामिल हैं। इनमें सोनू हेमला उर्फ कोरोटी (38), जो उत्तर बस्तर डिवीजन के केके सब-डिवीजन ब्यूरो इंचार्ज थे और 2003 से सक्रिय थे, और उनकी पत्नी सुकडी गावड़े शामिल हैं, जिन पर क्रमशः 8 लाख और 2 लाख रुपये का इनाम था। इसके अलावा, दो प्लाटून पार्टी कमेटी सदस्य (पीपीसीएम) कल्लू पुनेम (28) और कोसी कुंजाम (28), पार्टी सदस्य मोटी पुनेम (25), पांडे पुनेम (25), और पीएलजीए (पिपल्स लिबरेशन गोरिल्ला आर्मी) कैडर छोटू कुंजाम (19) भी शामिल हैं, जिन पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था। दो अन्य कैडर पर 5 लाख रुपये और नौ अन्य पर 2-2 लाख रुपये का इनाम था। ये नक्सली बीजापुर, गंगालूर, पामेड़, नैमेड, भैरमगढ़ और भोपालपट्टनम जैसे क्षेत्रों में सक्रिय थे।
Naxalites Surrender: सरकार की नीतियां और माओवादी विचारधारा से मोहभंग
बीजापुर के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि नक्सलियों ने माओवादी विचारधारा की खोखली और अमानवीय प्रकृति, आदिवासियों पर अत्याचार, और संगठन के भीतर आपसी मतभेदों से निराश होकर सरेंडर किया। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ सरकार की ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गांव) योजना और नई पुनर्वास नीति ने उन्हें प्रभावित किया। इस योजना के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य, बुनियादी सुविधाएं, और सुरक्षा बलों के शिविर स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे नक्सलियों में हिंसा छोड़ने की प्रेरणा बढ़ी है। बस्तर पुलिस द्वारा शुरू किया गया पूना मारगेम (पुनर्वास के लिए सामाजिक एकीकरण) अभियान भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
Naxalites Surrender: सरकारी सहायता और पुनर्वास की व्यवस्था
आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत तत्काल 50,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इसके अलावा, उन्हें शिक्षा, रोजगार, और सामाजिक पुनर्स्थापन के अवसर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू ‘छत्तीसगढ़ नक्सल सरेंडर/पीड़ित राहत और पुनर्वास नीति-2025’ में नक्सलियों के लिए कई उन्नत लाभ शामिल हैं, जैसे कि मासिक 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता, स्किल डेवलपमेंट प्रशिक्षण, मुफ्त भोजन और आवास, और पीएम आवास योजना का लाभ। यदि कोई इनामी नक्सली हथियार के साथ सरेंडर करता है, तो उसे इनाम की राशि और हथियार के लिए अतिरिक्त धनराशि दी जाएगी।
सुरक्षाबलों की भूमिका और नक्सल विरोधी अभियान
इस सरेंडर में राज्य पुलिस, सीआरपीएफ की 199वीं, 170वीं, और 85वीं बटालियन, और कोबरा (कमांडो बटालियन फॉर रिजॉल्यूट एक्शन) की 202वीं बटालियन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि 2025 में बीजापुर जिले में अब तक 307 नक्सलियों ने सरेंडर किया है, जो नक्सलवाद के खिलाफ अभियान की सफलता को दर्शाता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है, और इसके लिए सुरक्षाबलों की कार्रवाइयां तेज हो रही हैं।
नक्सलवाद पर बढ़ता दबाव और भविष्य की दिशा
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान ने इस साल 225 नक्सलियों को मार गिराया है, जिनमें से 208 बस्तर संभाग में मारे गए। इसके अलावा, 150 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया और कई ने सरेंडर किया। बीजापुर के कर्रेगुट्टा में हाल ही में स्थापित अस्थायी सुरक्षा शिविर और स्थायी चौकी की योजना नक्सल विरोधी अभियान को और मजबूती दे रही है। ‘नियद नेल्लानार’ योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार नक्सलियों को हिंसा छोड़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।
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