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सुकमा में परिवार की कार बही, चार की दुखद मौत: भारी बारिश ने मचाई तबाही

Chhattisgarh Accident: छत्तीसगढ़ में अचानक आई बाढ़ ने एक परिवार को हमेशा के लिए तोड़ दिया। तिरुपत्तूर जिले के एक परिवार के चार सदस्यों की दुखद मौत हो गई। जिसमें दो मासूम बच्चे भी शामिल थे।

Chhattisgarh Accident: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में मूसलाधार बारिश और अचानक आई बाढ़ ने एक परिवार को हमेशा के लिए तोड़ दिया। तमिलनाडु के तिरुपत्तूर जिले के एक परिवार के चार सदस्यों की दुखद मौत हो गई, जिसमें दो मासूम बच्चियां भी शामिल थीं। यह हादसा उस वक्त हुआ जब परिवार अपनी कार से सुकमा जिले से गुजर रहा था और बाढ़ के तेज बहाव ने उनकी मारुति डिजायर कार को बहा लिया। मृतकों में सिविल इंजीनियर राजेश कुमार (45), उनकी पत्नी पवित्रा (38) और उनकी बेटियां चौथ्या (8) और चौमिका (6) शामिल हैं। यह परिवार तिरुपत्तूर में एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ से अपने गृहनगर जा रहा था।

Chhattisgarh Accident: ऐसे हुआ हादसा

घटना मंगलवार, 26 अगस्त 2025 को सुकमा जिले में एनएच-30 पर कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के पास हुई। भारी बारिश के कारण कांगेर नाला उफान पर था, और परिवार अनजाने में बाढ़ग्रस्त सड़क पर कार चला रहा था। स्थानीय पुलिस के अनुसार, कार तेज बहाव में फंस गई और देखते ही देखते नाले में बह गई। कार चालक लाला यदु ने एक पेड़ को पकड़कर अपनी जान बचाई, लेकिन परिवार के चारों सदस्य डूब गए। स्थानीय लोगों और SDRF की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद मंगलवार देर रात शवों को बरामद किया। शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल ले जाया गया और बाद में तिरुपत्तूर भेजा गया, जहां परिवार का अंतिम संस्कार हुआ।

Chhattisgarh Accident: परिवार का छत्तीसगढ़ से गहरा नाता

राजेश कुमार पिछले 15 साल से छत्तीसगढ़ में रह रहे थे और रायपुर में एक सिविल इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। वे अपने समुदाय में सम्मानित थे और परिवार के साथ सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहते थे। उनकी अचानक मृत्यु ने तिरुपत्तूर और रायपुर दोनों जगह शोक की लहर दौड़ाई। रिश्तेदारों और दोस्तों ने इस हादसे को असहनीय क्षति बताया। एक पड़ोसी ने कहा, “राजेश और उनका परिवार बहुत ही मिलनसार था। यह हादसा हमारे लिए सदमे जैसा है।

Chhattisgarh Accident: बस्तर में बाढ़ का कहर

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में पिछले 36 घंटों से मूसलाधार बारिश ने तबाही मचा रखी है। सुकमा, बस्तर, बीजापुर, और दंतेवाड़ा जिलों में बाढ़ जैसे हालात हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, सुकमा में 35 से 109.3 मिमी और बस्तर में 67.3 से 121.3 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिससे 25 से अधिक गांव प्रभावित हुए। बस्तर के मांदर गांव में 85 मकान जलमग्न हो गए और 68 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया। हेलीकॉप्टर और नावों के जरिए राहत कार्य जारी हैं।

मुख्यमंत्री का जापान से निर्देश

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जापान प्रवास के दौरान बस्तर संभाग की बाढ़ स्थिति पर नजर रखी। उन्होंने राजस्व सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले और बस्तर संभाग आयुक्त डोमन सिंह से फोन पर बात कर राहत कार्यों की प्रगति जानी और आवश्यक निर्देश दिए। कंगाले ने बताया कि लोहंडीगुड़ा, दरभा और तोकापाल विकासखंडों में प्रशासन लगातार राहत कार्य चला रहा है। मांदर गांव से 21 ग्रामीणों को सुरक्षित निकाला गया।

सावधानी की अपील

मुख्य सचिव ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया और परिवार को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने लोगों से भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम की जानकारी रखने की अपील की। यह हादसा बाढ़ के दौरान सड़कों पर यात्रा के खतरों को रेखांकित करता है। प्रशासन ने चेतावनी जारी की है कि बस्तर संभाग में बारिश का दौर जारी रह सकता है।

राहत और जागरूकता की जरूरत

यह दुखद घटना बाढ़ प्रबंधन और मौसम चेतावनी प्रणालियों की महत्ता को उजागर करती है। सुकमा हादसा न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन और अप्रत्याशित बारिश के बढ़ते खतरों की ओर भी इशारा करता है। प्रशासन के राहत कार्यों के बावजूद, ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

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