Gold Silver Prices: कीमती धातुओं में ऐतिहासिक गिरावट ने बाजार को हिला दिया है। 31 जनवरी 2026 को शुक्रवार को सोना और चांदी की कीमतों में अभूतपूर्व क्रैश देखा गया। जहां चांदी का भाव एक ही दिन में 1 लाख रुपये से ज्यादा टूटकर प्रति किलो ₹2.91 लाख के आसपास पहुंच गया, वहीं सोना भी 33,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक सस्ता हो गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर यह गिरावट पिछले दिन के रिकॉर्ड हाई से आई है, जिसने निवेशकों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है।
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Gold Silver Prices: चांदी का बुलबुला फूटा, एक दिन में ₹1.07 लाख की गिरावट
चांदी ने पिछले कुछ दिनों में रॉकेट की रफ्तार पकड़ी थी। गुरुवार को MCX पर 5 मार्च एक्सपायरी वाली चांदी का भाव 4,20,048 रुपये प्रति किलो के ऐतिहासिक हाई पर पहुंचा और क्लोजिंग पर 3,99,893 रुपये पर बंद हुआ। लेकिन शुक्रवार को बाजार में बिकवाली का तूफान आया और भाव तेजी से गिरकर 2,91,922 रुपये प्रति किलो पर आ गया। यानी एक दिन में 1,07,971 रुपये की भारी गिरावट दर्ज हुई। हाई से देखें तो कुल 1,28,126 रुपये प्रति किलो सस्ती हुई चांदी।
एक्सपर्ट्स इसे चांदी का बुलबुला फूटना (सिल्वर बबल बर्स्ट) बता रहे हैं। हाल की तेजी में औद्योगिक मांग और सट्टेबाजी के कारण चांदी 4 लाख के पार गई थी, लेकिन अब मुनाफावसूली ने सब कुछ उलट दिया।
Gold Silver Prices: सोने में भी भारी गिरावट, हाई से ₹42,000 तक लुढ़का
सोने का हाल भी चांदी जैसा रहा। MCX पर 2 अप्रैल एक्सपायरी वाले सोने का वायदा भाव गुरुवार को 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के लाइफटाइम हाई पर पहुंचा और क्लोजिंग पर 1,83,962 रुपये पर बंद हुआ। शुक्रवार को यह 1,50,849 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। एक कारोबारी दिन में 33,113 रुपये की गिरावट आई, जबकि हाई से कुल 42,247 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हुआ।
घरेलू बाजार में भी 24 कैरेट सोना कई शहरों में ₹1.65 लाख से ₹1.69 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है, जबकि 22 कैरेट ₹1.55 लाख से ₹1.57 लाख के बीच है।
Gold Silver Prices: क्रैश के पीछे प्रमुख कारण
एक्सपर्ट्स के अनुसार, गिरावट के कई कारण हैं:
- मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग): ऐतिहासिक हाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने बड़े पैमाने पर बिकवाली की।
- अमेरिकी डॉलर की मजबूती: डॉलर इंडेक्स में तेजी से सोना-चांदी महंगा पड़ता है, जिससे मांग घटी।
- US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी: सुरक्षित बॉन्ड में बेहतर रिटर्न मिलने से निवेशक धातुओं से बाहर निकले।
- ट्रंप के बयान और फेड में बदलाव: डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से ग्लोबल टेंशन कम होने और फेड चेयर के लिए केविन वार्श की नामजदगी से बाजार में रिस्क-ऑफ मूड बना।
- ओवरहीटेड मार्केट: हाल की रैली बहुत तेज थी, जिससे तकनीकी करेक्शन जरूरी हो गया।
गोल्ड-सिल्वर ETF भी बुरी तरह प्रभावित हुए।
Gold Silver Prices: निवेशकों के लिए सलाह और आउटलुक
यह गिरावट निवेशकों के लिए बड़ा झटका है, खासकर उन लोगों के लिए जो हाल की तेजी में एंट्री लिए थे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लॉन्ग टर्म निवेशकों को पोर्टफोलियो में सोना-चांदी को 15% तक सीमित रखना चाहिए। बाजार में अभी अस्थिरता बनी रहेगी। फेड के संकेत, डॉलर की गति और ग्लोबल इकोनॉमी पर नजर रखें।
निवेश से पहले विशेषज्ञ सलाह जरूर लें, क्योंकि कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव आम है। यह क्रैश पिछले रिकॉर्ड रैली के बाद का करेक्शन माना जा रहा है, लेकिन भविष्य में रिकवरी भी संभव है।
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