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Delhi’s Pollution: लगातार चौथी बार दिल्ली बनी दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी, बिहार का यह शहर भी लिस्ट में

Delhi's Pollution: प्रदूषण की वजह से लोगों को कई तरह की शारीरिक समस्याएं होती हैं। हमारे देश के भी कई शहरों प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। देश की राजधानी दिल्ली का प्रदूषण स्तर भी खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। अब एक रिपोर्ट आई है, जिसमें दिल्ली को दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बताया गया है। वहीं इस लिस्ट में बिहार का एक शहर भी चर्चा में आ गया है।

Delhi’s Pollution: पूरी दुनिया में प्रदूषण एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। प्रदूषण की वजह से लोगों को कई तरह की शारीरिक समस्याएं होती हैं। हमारे देश के भी कई शहरों में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। देश की राजधानी दिल्ली का प्रदूषण स्तर भी खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।

बता दे कि स्विस ग्रुप आईक्यू एयर ने दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों और देशी की राजधानियों एक रिपोर्ट जारी कर दी है।, जिसमें दिल्ली को दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बताया गया है। वहीं इस लिस्ट में बिहार का एक शहर भी चर्चा में आ गया है। बिहार का बेगुसराय दुनिया के सबसे प्रदूषित महानगरीय क्षेत्रों से एक है।

लिस्ट में भारत आठवें स्थान पर:

दरअसल, स्विस संगठन IQAir ने हाल ही में एक लिस्ट जारी की है। यह लिस्ट विश्व वायु गुणवत्ता के आधार पर तैयार की गई है। इस रिपोर्ट में वर्ष 2023 में विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट तैयार की गई है। लिस्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में भारत को आठवें सबसे प्रदूषित देश के रूप में जगह मिली है।

हालांकि भारत प्रदूषण के मामले में बांग्लादेश और पाकिस्तान से पीछे है। इस लिस्ट में 134 देशों को शामिल किया गया है। इस लिस्ट में भारत का एक शहर का चौंकाने वाला नाम सामने आया है, जो वर्ष 2022 की लिस्ट में नहीं था। हम बात कर रहे हैं बिहार के बेगुसराय की। बेगुसराय का नाम इस लिस्ट में वैश्विक स्तर पर सबसे प्रदूषित महानगरीय क्षेत्र के रूप में आया है।

दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी:

दिल्ली के प्रदूषण स्तर से तो सभी वाकिफ हैं। दिल्ली को एक बार फिर से दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी का दर्जा मिला है। बता दें कि वर्ष 2018 से दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी की लिस्ट में आ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 1.36 अरब लोग पीएम2.5 सांद्रता का अनुभव करते हैं।

बता दें कि यह स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा अनुशंसित वार्षिक दिशानिर्देश स्तर 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार भारत की आबादी का 96 प्रतिशत यानी करीब 1.33 अरब लोग, डब्ल्यूएचओ के वार्षिक पीएम2.5 दिशानिर्देश से सात गुना अधिक प्रदूषण अनुभव करते हैं।

ऐसे निकाला गया डेटा:

स्विस संगठन IQAir द्वारा इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए कई देशों के अलग-अलग जगहों से डेटा इकट्ठा किया गया है और उसी आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है। इस डेटा को तैयार करने के लिए 30,000 से अधिक नियामक वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, सरकारी निकायों, संगठन, निजी कंपनियाँ और नागरिक वैज्ञानिकों से एकत्र किया गया था।

क्या कहती है डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट:

बता दें कि वर्ष 2022 में इस रिपोर्ट में 131 देशों को शामिल किया गया था। रिपोर्ट में 131 देशों के करीब 7,323 स्थानों का डेटा इकट्ठा किया गया था। वहीं पिछले साल की रिपोर्ट यानी 2023 के डेटा में 134 देशों के 7,812 स्थानों को शामिल किया गया है।

बताया जा रहा है कि वायु प्रदूषण की वजह से दुनियाभर में हर नौ मौतों में से एक का अनुमान है। वहीं डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण हर वर्ष दुनिया भर में सात मिलियन असामयिक मौतें होती हैं। ऐसे में डब्यूएचओ का कहना है कि वायु प्रदूषण मानव स्वास्थय के लिए बहुत खतरनाक है।

वायु प्रदूषण से हो सकती हैं गभीर बीमारियां:

वायु प्रदूषण की वजह से कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। PM2.5 वायु प्रदूषण के संपर्क में आने की वजह से अस्थमा, फेफड़ों की बीमारी, कैंसर और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। इसके अलावा वायु प्रदूषण की वजह से कई तरह की मानसिक परेशानियां भी हो सकती हैं। इसके अलावा डायबिटिज जैसी बीमारियां भी वायु प्रदूषण की वजह से हो सकती है।

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