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‘संविधान राष्ट्रपति से ऊपर है!’ ट्रंप को कोर्ट में हराने वाले भारतीय मूल के नील कात्याल ने रचा इतिहास, जानें कौन हैं वो

Neal Katyal: नील कात्याल भारतीय अप्रवासी माता-पिता (पिता डॉक्टर, माता इंजीनियर) के घर शिकागो में जन्मे। उन्होंने डार्टमाउथ कॉलेज और येल लॉ स्कूल से शिक्षा प्राप्त की।

Neal Katyal: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल और भारतीय मूल के वकील नील कात्याल ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापक टैरिफ नीति को चुनौती देने वाले मामले में बड़ी जीत हासिल की है। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप के टैरिफ को रद्द कर दिया, जिसमें उन्होंने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल कर लगभग हर व्यापारिक साझेदार पर आयात शुल्क लगाए थे। कात्याल, जो छोटे व्यवसायों की ओर से इस मामले की पैरवी कर रहे थे, ने फैसले को “कानून के शासन और अमेरिका के लिए पूरी जीत” करार दिया।

Neal Katyal: नील कात्याल कौन हैं?

नील कात्याल भारतीय अप्रवासी माता-पिता (पिता डॉक्टर, माता इंजीनियर) के घर शिकागो में जन्मे। उन्होंने डार्टमाउथ कॉलेज और येल लॉ स्कूल से शिक्षा प्राप्त की। जस्टिस स्टीफन ब्रेयर के क्लर्क रह चुके कात्याल को राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2010 में कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया था। वे सुप्रीम कोर्ट में 50 से अधिक मामलों में पैरवी कर चुके हैं, जो अल्पसंख्यक वकीलों के लिए रिकॉर्ड है। वर्तमान में जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी लॉ स्कूल में प्रोफेसर हैं और मिलबैंक LLP में पार्टनर।

Neal Katyal: ट्रंप के टैरिफ पर कात्याल की कड़ी आलोचना

कात्याल ने ट्रंप के टैरिफ को अन्यायपूर्ण और असंवैधानिक टैक्स बताया। उन्होंने कहा कि टैरिफ आयात पर लगाए गए कर हैं, और अमेरिकी संविधान के अनुसार केवल कांग्रेस ही जनता पर टैक्स लगा सकती है। राष्ट्रपति ने IEEPA का दुरुपयोग कर “राष्ट्रीय आपातकाल” के नाम पर व्यापार घाटे और फेंटानिल मौतों को आधार बनाया, लेकिन कात्याल ने इसे “गंभीर रूप से अवैध” और “मूल अमेरिकी मूल्यों के खिलाफ” करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि यह राष्ट्रपति की शक्ति का अतिक्रमण है, न कि किसी एक राष्ट्रपति का मुद्दा।

Neal Katyal: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने लर्निंग रिसोर्सेज इंक. बनाम ट्रंप मामले में फैसला सुनाया कि IEEPA राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का ऐसा व्यापक अधिकार नहीं देता। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स की राय में कहा गया कि टैरिफ टैक्स हैं, और “नो टैक्सेशन विदाउट रिप्रेजेंटेशन” का सिद्धांत लागू होता है। फैसले से ट्रंप के “लिबरेशन डे” टैरिफ (कनाडा-मैक्सिको पर 25%, चीन पर 10%, अन्य पर न्यूनतम 10%) रद्द हो गए। लिबर्टी जस्टिस सेंटर और छोटे व्यवसायों ने मुकदमा दायर किया था।

Neal Katyal: कात्याल के प्रमुख बयान

फैसले के बाद कात्याल ने कहा, “आज अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कानून के शासन और पूरे अमेरिका के लिए अपना पक्ष रखा। संदेश सीधा था कि राष्ट्रपति शक्तिशाली होते हैं, लेकिन हमारा संविधान उससे भी अधिक शक्तिशाली है। अमेरिका में केवल कांग्रेस ही अमेरिकी जनता पर टैक्स लगा सकती है।”

उन्होंने आगे कहा, अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने हमारे कानूनी मामले में हमारी हर मांग पूरी की। सब कुछ पूरा किया। और “यह मामला राष्ट्रपति पद से जुड़ा रहा है, किसी एक राष्ट्रपति से नहीं। मुझे खुशी है कि हमारा कोर्ट पिछले 250 वर्षों से सरकार की आधारशिला रहा है और हमारे मूलभूत मूल्यों की रक्षा कर रहा है। कात्याल ने इसे “पूर्ण और कुल जीत” बताया और कहा कि ट्रंप की कार्रवाई “मूल रूप से अन-अमेरिकन” थी।

ट्रंप की प्रतिक्रिया और प्रभाव

ट्रंप ने फैसले को “शर्मनाक” बताते हुए कुछ जजों पर “शर्म” जताई और नए 10% ग्लोबल टैरिफ की घोषणा की। लेकिन कात्याल का कहना है कि यह फैसला शक्तियों के पृथक्करण और कानून के शासन की जीत है। छोटे व्यवसायों और उपभोक्ताओं को राहत मिली, क्योंकि टैरिफ से कीमतें बढ़ रही थीं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे अरबों डॉलर के रिफंड का रास्ता खुलेगा।

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