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Monday, October 12, 2026
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पटना हाईकोर्ट ने बिहार के 42 विधायकों को जारी किया नोटिस: शपथपत्र में गलत/अधूरी जानकारी का आरोप

Patna High Court: पटना उच्च न्यायालय ने राज्य के 42 विधायकों को नोटिस जारी किया है, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, ऊर्जा एवं वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव (विजेंद्र यादव), पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा, जदयू विधायक चेतन आनंद और राजद विधायक अमरेंद्र प्रसाद जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

Patna High Court: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं। पटना उच्च न्यायालय ने राज्य के 42 विधायकों को नोटिस जारी किया है, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, ऊर्जा एवं वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव (विजेंद्र यादव), पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा, जदयू विधायक चेतन आनंद और राजद विधायक अमरेंद्र प्रसाद जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। ये नोटिस चुनावी शपथपत्र (एफिडेविट) में कथित रूप से गलत, अधूरी या छिपाई गई जानकारी देने के आरोपों पर जारी किए गए हैं।

Patna High Court: विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिला था बहुमत

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को भारी बहुमत मिला था। भाजपा ने 89 सीटें जीतीं, जबकि जदयू को 85 सीटें मिलीं। चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) ने 19, जीतन राम मांझी की हम को 5 और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 4 सीटें हासिल हुईं। महागठबंधन में राजद 25 सीटों पर सिमट गई और कांग्रेस को सिर्फ 6 सीटें मिलीं। चुनाव के बाद हारे हुए उम्मीदवारों और कुछ मतदाताओं ने कुल 40 अलग-अलग याचिकाएं दायर कीं, जिसमें विजयी विधायकों के नामांकन और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए।

Patna High Court: आरोप क्या हैं?

याचिकाकर्ताओं का मुख्य आरोप है कि विधायकों ने नामांकन के समय दाखिल फॉर्म-26 (शपथपत्र) में जरूरी जानकारी छिपाई या गलत दी। इसमें शामिल हैं:

  • आपराधिक इतिहास (क्रिमिनल एंटीसिडेंट्स) को छुपाना या अधूरा बताना।
  • संपत्ति, देनदारियां, वाहन और बैंक बैलेंस की गलत घोषणा।
  • कुछ कॉलम या पैराग्राफ खाली छोड़ना, जो जन प्रतिनिधित्व अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है।
  • कुछ याचिकाओं में वोट चोरी, मतगणना में गड़बड़ी और चुनावी प्रक्रिया की अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं।

पटना हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट शशिभूषण मंगलम ने बताया कि ये याचिकाएं चुनाव की पारदर्शिता और जनता को सही जानकारी देने के अधिकार से जुड़ी हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों (जैसे यूनियन ऑफ इंडिया बनाम एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) के अनुसार, उम्मीदवार को पूर्ण और सटीक जानकारी देना अनिवार्य है, ताकि मतदाता सूचित निर्णय ले सकें।

Patna High Court: कोर्ट की कार्रवाई

जस्टिस शशि भूषण प्रसाद सिंह की बेंच सहित विभिन्न बेंचों ने प्रारंभिक सुनवाई में आरोपों में दम पाया। 21 जनवरी और 19 फरवरी को अलग-अलग चरणों में 42 विधायकों को नोटिस जारी किया गया। विधायकों को निर्धारित समय में लिखित जवाब दाखिल करना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शपथपत्र में गलत जानकारी गंभीर मामला है, जो चुनाव को प्रभावित कर सकती है। अगर आरोप साबित हुए तो सदस्यता रद्द होने का प्रावधान है, हालांकि अंतिम फैसला सुनवाई के बाद होगा।

Patna High Court: बिहार की राजनीति में हलचल

यह घटनाक्रम बिहार की राजनीति में हलचल मचा रहा है। सत्ता पक्ष (एनडीए) और विपक्ष (महागठबंधन) दोनों के विधायक प्रभावित हैं, जिससे सभी पार्टियों में चिंता है। यदि कई विधायकों की सदस्यता रद्द हुई तो विधानसभा में बहुमत प्रभावित हो सकता है और उपचुनाव की स्थिति बन सकती है। फिलहाल, विधायकों के वकील जवाब तैयार कर रहे हैं और मामला लंबित है।

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