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Wednesday, September 16, 2026
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उत्तराखंड में UCC संशोधन अध्यादेश लागू: लिव-इन, विवाह और पंजीकरण में सख्त नियम, राज्यपाल की मंजूरी के बाद तत्काल प्रभाव

Uttarakhand UCC: अध्यादेश का उद्देश्य मूल समान नागरिक संहिता (UCC), 2024 में प्रक्रियात्मक, प्रशासनिक और दंडात्मक कमियों को दूर करना है, ताकि कानून का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सुचारु हो सके।

Uttarakhand UCC: उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) की स्वीकृति के बाद तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। यह अध्यादेश संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत जारी किया गया है। अध्यादेश का उद्देश्य मूल समान नागरिक संहिता (UCC), 2024 में प्रक्रियात्मक, प्रशासनिक और दंडात्मक कमियों को दूर करना है, ताकि कानून का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सुचारु हो सके। UCC उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 से लागू हुई थी और अब एक वर्ष पूर्ण होने से ठीक पहले ये संशोधन लाए गए हैं।

Uttarakhand UCC: आपराधिक कानूनों में बदलाव

अध्यादेश में आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और दंड प्रावधानों के लिए भारतीय न्याय संहिता, 2023 को लागू किया गया है। इससे UCC के दंडात्मक ढांचे को नए राष्ट्रीय कानूनों से जोड़ा गया है, जो अधिक आधुनिक और स्पष्ट हैं।

Uttarakhand UCC: प्रशासनिक सुधार और सक्षम प्राधिकारी

धारा 12 में ‘सचिव’ के स्थान पर ‘अपर सचिव’ को सक्षम प्राधिकारी नामित किया गया है। उप-पंजीयक द्वारा निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई न करने पर प्रकरण स्वतः पंजीयक और फिर पंजीयक जनरल को अग्रेषित होगा। उप-पंजीयक पर लगाए गए दंड के खिलाफ अपील का अधिकार दिया गया है। दंड की वसूली अब भू-राजस्व की तरह की जाएगी, जिससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी।

Uttarakhand UCC: विवाह और पहचान में सख्ती

विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत प्रस्तुति (फर्जी दस्तावेज या छिपाई गई जानकारी) को अब विवाह निरस्तीकरण का आधार बनाया गया है। विवाह या लिव-इन संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी या विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान जोड़े गए हैं। यह महिलाओं और कमजोर पक्ष की सुरक्षा को मजबूत करेगा।

Uttarakhand UCC: लिव-इन संबंधों में नए नियम

लिव-इन संबंध की समाप्ति पर पंजीयक द्वारा समाप्ति प्रमाण पत्र जारी करने का प्रावधान किया गया है। इससे संबंध समाप्त होने पर कानूनी स्पष्टता आएगी और विवाद कम होंगे। अनुसूची-2 में ‘विधवा’ शब्द को हटाकर ‘जीवनसाथी’ शब्द का प्रतिस्थापन किया गया है, जो अधिक समावेशी है।

Uttarakhand UCC: पंजीकरण निरस्त करने की शक्ति

विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध और उत्तराधिकार से जुड़े पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति अब पंजीयक जनरल को दी गई है। इससे फर्जी या गैर-कानूनी पंजीकरणों पर त्वरित कार्रवाई संभव होगी।

Uttarakhand UCC: उद्देश्य और प्रभाव

ये संशोधन UCC को अधिक व्यावहारिक और नागरिक-अनुकूल बनाने के लिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार का दावा है कि इससे प्रशासनिक बाधाएं दूर होंगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों के अधिकारों की बेहतर रक्षा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ये बदलाव UCC के क्रियान्वयन में आने वाली शुरुआती समस्याओं (जैसे पंजीकरण में देरी, दंड की वसूली आदि) को दूर करेंगे।

पहला राज्य बना उत्तराखंड

उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां UCC लागू हुई है। ये संशोधन विपक्ष की आलोचनाओं (जैसे प्रक्रियात्मक जटिलता) का जवाब माने जा रहे हैं। अध्यादेश विधानसभा सत्र में विधेयक के रूप में पेश किया जा सकता है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि UCC सभी नागरिकों के लिए समान न्याय सुनिश्चित करे, बिना किसी भेदभाव के।

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