Unnao Rape Case: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली जमानत और सजा निलंबन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। CBI ने 26 दिसंबर को विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल कर दिल्ली हाईकोर्ट के 23 दिसंबर के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें सेंगर की उम्रकैद की सजा अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दी गई थी और कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी गई थी। इस कदम से मामले में नया मोड़ आ गया है और सबकी नजरें अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।
Unnao Rape Case: CBI की याचिका और तर्क
CBI की ओर से दाखिल SLP में कहा गया है कि दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला कानून के विपरीत और ‘विकृत’ है। एजेंसी ने तर्क दिया कि ऐसे गंभीर अपराध में दोषसिद्धि के बाद जमानत या सजा निलंबन अपवाद होना चाहिए, नियम नहीं। CBI ने यह भी जोर दिया कि सेंगर को रिहा करने से पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है, क्योंकि पहले भी धमकियां मिल चुकी हैं। एजेंसी ने सेंगर के आपराधिक इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि उनकी रिहाई न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को प्रभावित करेगी। CBI ने पहले ही 24 दिसंबर को घोषणा की थी कि वह हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देगी।
Unnao Rape Case: दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर) ने 23 दिसंबर को सेंगर की अपील लंबित रहने तक उम्रकैद की सजा निलंबित कर दी। कोर्ट ने उन्हें 15 लाख रुपये के निजी मुचलके और तीन जमानतदारों के साथ जमानत दी। शर्तों में शामिल है कि सेंगर पीड़िता के दिल्ली स्थित निवास से 5 किलोमीटर के दायरे में नहीं आएंगे, पीड़िता या उसके परिवार को धमकी नहीं देंगे और अपील के दौरान दिल्ली में ही रहेंगे। किसी शर्त का उल्लंघन होने पर जमानत रद्द हो जाएगी। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि सेंगर ने पहले ही सात साल पांच महीने जेल में बिता लिए हैं। हालांकि, इस जमानत के बावजूद सेंगर फिलहाल जेल में ही हैं, क्योंकि वह पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 साल की सजा काट रहे हैं और उसमें जमानत नहीं मिली है।
Unnao Rape Case: मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 2017 का है, जब उन्नाव की एक नाबालिग लड़की ने तत्कालीन भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर अपहरण और बलात्कार का आरोप लगाया था। मामला सामने आने के बाद पीड़िता के परिवार को धमकियां मिलीं, उसके पिता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई और 2019 में पीड़िता का सड़क हादसा भी हुआ, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हुई। पूरे देश में आक्रोश के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2019 में मामले को उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया और तेज सुनवाई के आदेश दिए। दिसंबर 2019 में दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 25 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जनवरी 2020 में सेंगर ने हाईकोर्ट में अपील दायर की और मार्च 2022 में सजा निलंबन की याचिका लगाई, जिसका CBI और पीड़िता की ओर से कड़ा विरोध हुआ।
Unnao Rape Case: पीड़िता और विपक्ष का विरोध
हाईकोर्ट के फैसले के बाद पीड़िता और उसके परिवार ने तीव्र विरोध जताया। पीड़िता ने इसे अपने परिवार के लिए ‘काल’ बताया और कहा कि इससे उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। उन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात कर मदद मांगी और खुद भी सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी की घोषणा की। विपक्षी दलों ने भी फैसले की निंदा की, इसे न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला बताया। दिल्ली में प्रदर्शन हुए, जहां महिला कार्यकर्ताओं ने हाईकोर्ट के बाहर विरोध दर्ज किया। पीड़िता की मां को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में भी लिया गया।
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