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Tuesday, February 17, 2026
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प्रधानमंत्री कार्यालय का बदला नाम, जानिए अब किस नाम से जाना जाएगा नया PMO

PMO New Name: सेवा तीर्थ के रूप में इसका नामकरण इस बात का संकेत है कि यहां लिए जाने वाले निर्णय केवल शासन के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों की भलाई को सर्वोपरि रखते हुए लिए जाएंगे।

PMO New Name: देश की प्रशासनिक संरचना में जनसेवा की भावना को सर्वोच्च स्थान देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) परिसर का नाम अब ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया है। यह नाम उस नागरिक-प्रथम मॉडल को दर्शाता है जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने शासन के केंद्र में रखा है। लंबे समय से चली आ रही औपचारिक शासन-परंपरा से आगे बढ़ते हुए यह कदम प्रशासन को जनसरोकारों से और गहराई से जोड़ने का प्रयास है।

PMO New Name: सेंट्रल विस्टा का नया केंद्र: सरकारी निर्णयों का आधुनिक हब

सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत लगभग तैयार हो चुका यह नया परिसर न केवल प्रधानमंत्री कार्यालय का मुख्य स्थल होगा, बल्कि इसमें कई प्रमुख संस्थान भी शामिल किए गए हैं।
इसमें शामिल हैं—

  • कैबिनेट सचिवालय
  • नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सचिवालय (NSCS)
  • भारत हाउस, जहां अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ उच्चस्तरीय बैठकों का आयोजन होगा

नई संरचना को अत्याधुनिक तकनीक, सुरक्षा और वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है। ‘सेवा तीर्थ’ के रूप में इसका नामकरण इस बात का संकेत है कि यहां लिए जाने वाले निर्णय केवल शासन के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों की भलाई को सर्वोपरि रखते हुए लिए जाएंगे।

PMO New Name: ‘सेवा तीर्थ’: शासन का पवित्र स्थल, जनकल्याण केंद्र में

प्रधानमंत्री मोदी की ‘सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण’ की नीति इस नए नाम में स्पष्ट दिखाई देती है। ‘सेवा तीर्थ’ यह दर्शाता है कि शासन शक्ति का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का पवित्र स्थल है। नई संरचना के माध्यम से सरकार यह संदेश देना चाहती है कि प्रशासन का हर अंग, हर फैसला और हर कदम 140 करोड़ नागरिकों के कल्याण से सीधे जुड़ा है।

PMO New Name: देशभर में शासन से जुड़े भवनों के नामों में बड़ा बदलाव

यह नामकरण सिर्फ एक घटना नहीं है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों से चल रहे प्रतीकात्मक बदलाव की एक निरंतर श्रृंखला का हिस्सा है। देशभर में राजभवनों का नाम ‘लोक भवन’ रखा जा रहा है—इस भावना के साथ कि राज्य सत्ता लोगों की है और शासन उनके हितों की सेवा के लिए है।

पिछले दिनों जिन राज्यों/शहरों में राजभवन ने आधिकारिक रूप से ‘लोक भवन’ नाम अपनाया है, उनमें शामिल हैं—

  • देहरादून
  • नैनीताल
  • तिरुवनंतपुरम
  • अगरतला
  • कोलकाता

इन बदलावों को जनता की ओर से व्यापक समर्थन मिला है और इसे सही मायने में लोकतंत्र की नई दिशा के रूप में देखा जा रहा है।

नाम बदला है, लेकिन संदेश गहरा है

राजनीतिक विश्लेषकों और प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव सिर्फ औपचारिक नाम परिवर्तन नहीं है। यह भारतीय लोकतंत्र के बदलते मूल्यों, नई सोच और नये प्रशासनिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। बीते एक दशक में प्रधानमंत्री मोदी ने शासन के हर क्षेत्र में ‘लोक-केन्द्रित प्रशासन’ की नीति को आगे बढ़ाया है—

  • कार्यप्रणाली में पारदर्शिता
  • नागरिकों से सीधा संवाद
  • योजनाओं में गरीब-प्रथम दृष्टिकोण
  • और व्यवस्था में जवाबदेही
    ‘सेवा तीर्थ’ इन्हीं मूल्यों के प्रतीक के रूप में उभरेगा।

PMO New Name: सिर्फ नाम नहीं, प्रशासन की सोच में भी आ रहा बदलाव

सरकार का कहना है कि यह परिवर्तन भवनों या मार्गों के नाम बदलने भर तक सीमित नहीं है।
यह प्रशासनिक तंत्र में एक बड़े विचारात्मक बदलाव का संकेत है— जहां शासन जनता के लिए है, जनता की भागीदारी से है और जनता के हित में है। नई संरचना और नए नाम के साथ यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि सरकार अधिकार का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा की धारा का केंद्र बनेगी।

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