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Tuesday, September 1, 2026
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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को बड़ा झटका, 25 लाख के इनामी नक्सली चैतू ने किया आत्मसमर्पण

Naxalite Surrender: पुलिस के अनुसार, नक्सली चैतू उर्फ श्याम दादा को वर्ष 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले का मुख्य मास्टरमाइंड माना जाता है।

Naxalite Surrender: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से पुलिस और सुरक्षाबलों के लिए सिरदर्द बने 25 लाख रुपए के इनामी नक्सली चैतू उर्फ श्याम दादा ने शुक्रवार को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। चैतू दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सक्रिय सदस्य था और उस पर कई बड़े हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने के आरोप थे।

Naxalite Surrender: झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड

पुलिस के अनुसार, चैतू को वर्ष 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले का मुख्य मास्टरमाइंड माना जाता है। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था, जिसमें छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कई शीर्ष नेता मारे गए थे। लंबे समय तक चैतू माओवादी संगठन के दरभा डिवीजन का प्रभारी भी रहा और संगठन की कई रणनीतियों में उसकी अहम भूमिका रही।

Naxalite Surrender: नौ अन्य नक्सलियों ने भी डाले हथियार

चैतू के साथ कुल 9 अन्य नक्सलियों ने भी पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इन सभी पर मिलाकर कुल 65 लाख रुपए का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वालों में कई एरिया कमेटी सदस्य भी शामिल हैं।

सरेंडर करने वाले नक्सलियों के नाम इस प्रकार हैं:

– सरोज उर्फ डीसीवीएम – 8 लाख रुपए इनाम
– भूपेश उर्फ सहायक राम
– प्रकाश
– कमलेश उर्फ झिटरू
– जननी उर्फ रयमती कश्यप
– संतोष उर्फ सन्नू
– नवीन
– रमशीला
– जयती कश्यप

इन सभी का बस्तर क्षेत्र में सक्रिय नक्सल नेटवर्क से सीधा जुड़ाव था और स्थानीय स्तर पर आतंक फैलाने, वसूली, भर्ती और हमलों को अंजाम देने में ये शामिल रहे थे।

Naxalite Surrender: लगातार ऑपरेशनों और पुनर्वास नीति का असर

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पिछले कई महीनों से सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे एंटी-नक्सल ऑपरेशन और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के चलते माओवादियों पर काफी दबाव बना है। बस्तर रेंज में वरिष्ठ नक्सलियों के आत्मसमर्पण और मारे जाने से संगठन का मनोबल तेजी से गिरा है। इसी दबाव के चलते चैतू सहित कई हार्डकोर नक्सलियों ने हथियार छोड़ने का फैसला किया।

पुलिस का कहना है कि राज्य सरकार की अपील, सहूलियतें और पूर्व नक्सलियों को दी जा रही सुविधाओं का भी इन पर असर पड़ा। कई नक्सलियों ने बताया कि लगातार संघर्ष, भाग-दौड़ और संगठन के अंदर बढ़ते अविश्वास ने उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया।

Naxalite Surrender: हथियार और विस्फोटक किए पुलिस को समर्पित

आत्मसमर्पण के दौरान चैतू और अन्य नक्सलियों ने पुलिस को रायफलें, पिस्तौल, विस्फोटक सामग्री और गोला-बारूद सौंप दिए। पुलिस ने इन सभी को सुरक्षा प्रदान की है और पुनर्वास के तहत उन्हें रहने की व्यवस्था के साथ आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।

बस्तर में बड़ी सफलता, शांति की ओर कदम

छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक ने इसे बस्तर में शांति स्थापना की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि चैतू जैसा बड़ा और खतरनाक नक्सली का सरेंडर न सिर्फ संगठन के कमजोर होने का संकेत है बल्कि आने वाले समय में और भी नक्सलियों के हथियार डालने की संभावना बढ़ गई है।

पुलिस के अनुसार, इस वर्ष अब तक 150 से अधिक नक्सली या तो मारे जा चुके हैं या आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जो नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता है। अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद काफी हद तक कम हो जाएगा और आम लोगों के लिए शांति का वातावरण फिर से स्थापित होगा।

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