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नए लेबर कोड से 77 लाख नई नौकरियां और 75,000 करोड़ अतिरिक्त खपत! SBI रिपोर्ट

New Labour Codes: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की ताजा रिसर्च रिपोर्ट ने दावा किया है कि चार नए लेबर कोड लागू होने के बाद छोटे ट्रांजिशन पीरियड के बाद मीडियम टर्म में बेरोजगारी दर 1.3 प्रतिशत अंक तक कम हो सकती है। इससे मौजूदा 60.1% लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट के आधार पर करीब 77 लाख अतिरिक्त रोजगार सृजित होंगे। रिपोर्ट में इसे अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर बताया गया है, जो फॉर्मलाइजेशन को तेज करेगा, सोशल सिक्योरिटी कवरेज 80-85% तक ले जाएगा और उपभोग को भी बड़ा बूस्ट देगा।

New Labour Codes: 77 लाख नए रोजगार + 75,000 करोड़ अतिरिक्त खपत

SBI के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्या कांति घोष की अगुवाई में तैयार रिपोर्ट के अनुसार, नए कोड लागू होने से औसत बचत दर 30% रहने पर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 66 रुपये की अतिरिक्त खपत होगी। कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था में 75,000 करोड़ रुपये का नया उपभोग जुड़ेगा। डॉ. घोष ने कहा, “लेबर कोड सिर्फ रोजगार नहीं बढ़ाएंगे, बल्कि उपभोग चक्र को भी मजबूत करेंगे। यह आत्मनिर्भर भारत की नींव रखने वाला कदम है।”

New Labour Codes: फॉर्मलाइजेशन में 15.1% का उछाल

रिपोर्ट में पीएलएफएस (Periodic Labour Force Survey) डेटा के आधार पर बताया गया है कि वर्तमान में फॉर्मल सेक्टर में केवल 60.4% वर्कर्स हैं। नए कोड लागू होने से फॉर्मलाइजेशन रेट में 15.1 प्रतिशत अंक का इजाफा होगा और कुल फॉर्मल वर्कफोर्स 75.5% तक पहुंच जाएगा। भारत में अभी 44 करोड़ लोग असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जिनमें से 31 करोड़ ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर्ड हैं। अगर सिर्फ 20% लोग इनफॉर्मल से फॉर्मल पे-रोल में शिफ्ट होते हैं, तो भी 10 करोड़ लोगों को सीधा फायदा होगा।

New Labour Codes: सोशल सिक्योरिटी कवरेज 80-85% तक पहुंचेगा

रिपोर्ट में अनुमान है कि अगले 2-3 वर्षों में देश की सोशल सिक्योरिटी कवरेज 80-85% तक पहुंच जाएगी। अभी यह आंकड़ा 50-55% के आसपास माना जाता है। नए कोड में सभी वर्कर्स के लिए यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी का प्रावधान है, जिससे असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को पेंशन, हेल्थ इंश्योरेंस और मातृत्व लाभ जैसे फायदे मिलेंगे।

New Labour Codes: ट्रांजिशन पीरियड में चुनौतियां, मीडियम टर्म में बड़ा फायदा

रिपोर्ट मानती है कि शुरुआती दौर में फर्म-लेवल एडजस्टमेंट कॉस्ट और राज्य-स्तरीय नियमों में एकरूपता की कमी से कुछ दिक्कतें आएंगी, लेकिन मीडियम टर्म में लाभ बहुत ज्यादा होंगे। डॉ. घोष ने कहा, “लेबर कोड कर्मचारी और एम्प्लॉयर दोनों को सशक्त बनाएंगे। इससे लेबर मार्केट ज्यादा फ्लेक्सिबल और प्रतिस्पर्धी बनेगा।”

चार नए लेबर कोड: एक नजर में

  • वेज कोड 2019 – न्यूनतम वेतन और समय पर पेमेंट की गारंटी
  • इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड 2020 – हायरिंग-फायरिंग में आसानी, ट्रेड यूनियन नियम
  • ओएसएच एवं वर्किंग कंडीशंस कोड 2020 – सुरक्षा, वर्किंग ऑवर्स, महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट
  • सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 – सभी वर्कर्स के लिए यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी

New Labour Codes: राज्यों की तैयारी अहम

केंद्र ने चारों कोड को 2020 में ही संसद से पास कर लिया था, लेकिन इनका क्रियान्वयन राज्य सरकारों पर निर्भर है। अभी तक 26 राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों ने प्री-पब्लिश्ड ड्राफ्ट नियम जारी कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 तक ज्यादातर राज्य इसे पूरी तरह लागू कर देंगे।

अर्थशास्त्रियों की राय

नीति आयोग के पूर्व वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने कहा, “SBI की रिपोर्ट पुष्टि करती है कि लेबर कोड भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड को कैश करने का सबसे बड़ा टूल हैं।” वहीं इंडिया रेटिंग्स के चीफ इकोनॉमिस्ट डी.के. पंत ने कहा, “अगर फॉर्मलाइजेशन बढ़ता है तो जीडीपी ग्रोथ में 0.5-0.7% का अतिरिक्त बूस्ट मिल सकता है।”

नए लेबर कोड अब सिर्फ कानून नहीं, बल्कि भारत के 140 करोड़ लोगों के आर्थिक भविष्य का नया अध्याय बनने जा रहे हैं। SBI की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि सही और तेज क्रियान्वयन हुआ तो 2030 तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर और तेजी से दौड़ेगा।

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