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Monday, September 21, 2026
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बीजापुर में CRPF की BDS टीम को बड़ी सफलता, पांच IED बरामद

Chhattisgarh: बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। सीआरपीएफ की बीडीएसटीम ने नक्सलियों द्वारा लगाए गए पांच खतरनाक आईईडी बरामद कर उन्हें सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दिया।

Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिलों में सुरक्षाबलों को लगातार सफलताएं मिल रही हैं। बीजापुर जिले के भोपालपटनम थाना क्षेत्र में सीआरपीएफ की बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वॉड (बीडीएस) टीम ने नक्सलियों द्वारा लगाए गए पांच खतरनाक आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बरामद कर सुरक्षित रूप से नष्ट कर दिए। वहीं, नारायणपुर के अभूझमाड़ क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में दो केंद्रीय समिति के शीर्ष माओवादी मार गिराए गए। ये कार्रवाइयां नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र और राज्य सरकार की सख्त रणनीति का प्रमाण हैं, जो मार्च 2026 तक नक्सलमुक्त भारत के संकल्प को मजबूत कर रही हैं।

Chhattisgarh: बीजापुर में आईईडी जाल तोड़ा: सुरक्षाबलों की सतर्कता ने बचाई जानें

नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के भोपालपटनम ब्लॉक के नेशनल पार्क क्षेत्र में स्थित चिल्लामरका कैंप से मंगलवार को 214वीं बटालियन सीआरपीएफ, 206वीं कोबरा यूनिट, स्थानीय डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) और बीडीएस की संयुक्त टीम एरिया डॉमिनेशन अभियान पर रवाना हुई। चिल्लामरका से कांडलापर्ती की ओर बढ़ते हुए करीब 4 किलोमीटर दूर एक नाले को पार करने के बाद टीम ने संदिग्ध गतिविधियां भांप लीं। घने जंगलों में बारीकी से तलाशी लेने पर 214वीं बटालियन की बीडीएस टीम ने क्रमवार पांच आईईडी बरामद किए।

जिले के एसपी ने बताया कि नक्सलियों ने इन आईईडी को सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से जंगल के भीतर छुपाकर लगाया था। दुर्गम पहाड़ी इलाके और घने जंगलों को ध्यान में रखते हुए ये विस्फोटक अत्यधिक खतरनाक तरीके से प्लांट किए गए थे, ताकि सुरक्षाबलों की मूवमेंट के दौरान भारी क्षति हो सके। सतर्कता और सटीक खोजबीन के चलते बीडीएस टीम ने इन्हें समय रहते डिटेक्ट कर निष्क्रिय कर दिया। बरामद आईईडी में भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री थी, जो सड़क निर्माण या गश्ती दलों को निशाना बनाने के लिए तैयार की गई थी।

यह कार्रवाई बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों की आईईडी रणनीति को झटका है। हाल ही में सुकमा में सीआरपीएफ ने 10 किलो का एक आईईडी नष्ट किया था, जबकि बीजापुर में जनवरी में 20 किलो का विस्फोटक बरामद हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयां न केवल सुरक्षाबलों की जान बचाती हैं, बल्कि नक्सलियों की मनोबल को तोड़ती हैं।

Chhattisgarh: नारायणपुर में मुठभेड़: दो केंद्रीय समिति सदस्य मारे गए, 80 लाख का इनाम

इधर, नारायणपुर जिले के अभूझमाड़ क्षेत्र में सोमवार को सुरक्षाबलों ने माओवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में दो बड़े कमांडरों को मार गिराया। दोनों पर छत्तीसगढ़ सरकार ने 40-40 लाख रुपये का इनाम घोषित था। मारे गए माओवादियों की पहचान सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति के सदस्य राजू दादा उर्फ कट्टा रामचंद्र रेड्डी (63 वर्ष) और कोसा दादा उर्फ कादरी सत्यनारायण रेड्डी (67 वर्ष) के रूप में हुई। दोनों तेलंगाना के करीमनगर जिले के निवासी थे और पिछले तीन दशकों से दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति (डीकेजेडसी) के तहत सक्रिय थे।

नारायणपुर के एसपी रॉबिन्सन गुरीया ने बताया कि छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर अभूझमाड़ के जंगलों में माओवादियों की गतिविधियों की खुफिया जानकारी मिलने के बाद संयुक्त टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सुबह से रुक-रुक कर गोलीबारी कई घंटों तक चली। मुठभेड़ थमने पर मौके से दो शव, एक एके-47 राइफल, एक इंसास राइफल, एक बीजीएल लॉन्चर, भारी मात्रा में विस्फोटक, माओवादी साहित्य और दैनिक उपयोग की वस्तुएं बरामद की गईं। राजू दादा के अन्य नाम गूडसा उसेंदी, विजय और विकल्प थे, जबकि कोसा दादा को गोपन्ना और बूचन्ना कहा जाता था। ये दोनों नक्सली हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता थे, जिनकी योजना से कई जवान शहीद हुए और निर्दोष नागरिक मारे गए।

बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने इसे माओवादियों के खिलाफ निर्णायक झटका बताया। उन्होंने कहा, ये दोनों दंडकारण्य में तीन दशक से सक्रिय थे और हिंसा के मास्टरमाइंड थे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट कर इसे नक्सलियों के खिलाफ बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा, अभूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने दो केंद्रीय समिति सदस्य नक्सली नेताओं – कट्टा रामचंद्र रेड्डी और कादरी सत्यनारायण रेड्डी – को मार गिराया। मार्च 2026 तक नक्सलमुक्त भारत का लक्ष्य हासिल होगा।

Chhattisgarh: नक्सल उन्मूलन अभियान: सतत प्रयासों का नतीजा

ये दोनों घटनाएं छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन अभियान की सफलता का प्रतीक हैं। इस साल राज्य में 249 नक्सली मारे जा चुके हैं, जिनमें से अधिकांश बस्तर संभाग में। हाल ही में 11 सितंबर को गारियाबंद में 10 नक्सली ढेर हुए थे। सीआरपीएफ, कोबरा और डीआरजी की संयुक्त कार्रवाइयां खुफिया तंत्र पर आधारित हैं।

आईजी सुंदरराज ने अपील की, माओवादी गतिविधियां अंतिम चरण में हैं। हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटें। राज्य सरकार की आत्मसमर्पण नीति से नया जीवन शुरू कर सकते हैं। 18 सितंबर को ही नारायणपुर में 12 नक्सलियों ने हथियार डाले थे।

नेताओं के बयान: नक्सलवाद का अंत निकट

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक्स पर कहा, अभूझमाड़ में सुरक्षाबलों ने लाल आतंक के खिलाफ सफल अभियान चलाया। दो नक्सली न्यूट्रलाइज। यह नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में निर्णायक कदम है। डबल इंजन सरकार के प्रयासों से अंत निकट है। अमित शाह ने मोदी के विजन का जिक्र करते हुए नक्सलमुक्त भारत का संकल्प दोहराया।

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